वैशाली के 12 बच्चे बेहतर भविष्य की उम्मीद संग पटना रवाना, जन्मजात विकृतियों के इलाज के लिए आरबीएसके के तहत विशेष अभियान तेज
- डीएम वर्षा सिंह के नेतृत्व में जिला स्वास्थ्य समिति की अनूठी पहल
- कटे होंठ, कटे तालू और टंग टाई से ग्रसित बच्चों का होगा मुफ्त इलाज
वैशाली। जिले में जन्मजात विकृतियों से जूझ रहे नौनिहालों के जीवन में खुशियां लौटने और उन्हें सामान्य जीवन जीने का अवसर देने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से मुस्तैद नजर आ रहा है। जिला पदाधिकारी, वैशाली, वर्षा सिंह के कुशल नेतृत्व में जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में 12 बच्चों को 04 एम्बुलेंस के जरिए इलाज के लिए पटना स्थित मेडीवर्सल मैत्री अस्पताल भेजा गया है।
बच्चों को रवाना किए जाने के दौरान जिला समन्वयक (डीसी आरबीएसके) डॉ. शाइस्ता, डॉ. नीतू कुमारी और आरबीएसके के फार्मासिस्ट नवीन कुमार विशेष रूप से मौजूद रहे। इन अधिकारियों ने बच्चों और उनके परिजनों का हौसला बढ़ाया।
अस्पताल में होगी संपूर्ण जाँच और सर्जरी:
स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि पटना के मेडीवर्सल मैत्री अस्पताल में इन बच्चों की संपूर्ण स्वास्थ्य जाँच की जाएगी। जाँच के उपरांत शल्य चिकित्सा (सर्जरी) के लिए पूरी तरह उपयुक्त पाए जाने वाले बच्चों का निशुल्क ऑपरेशन कराया जाएगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों में जन्मजात विकृतियों (जैसे क्लेफ्ट लिप, क्लेफ्ट पैलेट और टंग टाई) की समय पर पहचान कर उन्हें उच्च स्तरीय चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि उनके खाने-पीने, बोलने और दैनिक जीवन से जुड़ी तमाम कठिनाइयों को हमेशा के लिए दूर किया जा सके।
अब तक तीन सफल ऑपरेशन सम्पन्न:
आरबीएसके की जिला समन्वयक डॉ. शाइस्ता ने बताया कि 2 अक्टूबर से शुरू हुए इस विशेष अभियान के तहत अब तक तीन बच्चों का सफल ऑपरेशन कराया जा चुका है। इनमें से दो बच्चों का ऑपरेशन 'स्माइल ट्रेन' के सहयोग से मेडीवर्सल मैत्री अस्पताल, पटना में हुआ, जिनमें एक बच्चा क्लेफ्ट लिप और दूसरा क्लेफ्ट पैलेट की समस्या से ग्रसित था। दोनों की सर्जरी सफल रही और उन्हें स्वस्थ होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। इसके अलावा, टंग टाई की समस्या से पीड़ित एक अन्य बच्चे का सफल ऑपरेशन एनएमसीएच, पटना में कराया गया है।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि कुछ बच्चे कम वजन के पाए गए थे, जिन्हें स्वास्थ्य सुधार के लिए पोषण संबंधी पूरक आहार (सप्लीमेंट्स) उपलब्ध कराया गया है ताकि वे ऑपरेशन के लिए पूरी तरह स्वस्थ हो सकें।
सिविल सर्जन और डीपीएम की दो टूक: कोई बच्चा न छूटे
सिविल सर्जन-सह-सदस्य सचिव, जिला स्वास्थ्य समिति, वैशाली ने आम नागरिकों और अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने आस-पास ऐसे बच्चों की पहचान करें और उनके परिजनों को इलाज के वास्ते आगे आने के लिए प्रेरित करें।
वहीं, जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) डॉ. कुमार मनोज ने जिले की तमाम आशा कार्यकर्ताओं से अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसे बच्चों को विशेष रूप से चिह्नित करने को कहा है। उन्होंने निर्देश दिया कि चिह्नित बच्चों का पंजीकरण आरबीएसके मोबाइल हेल्थ टीम के माध्यम से जिला समन्वयक के पास तुरंत कराया जाए, जिससे उन्हें समय पर अस्पताल तक पहुँचाया जा सके।
14 नवंबर तक चलेगा विशेष अभियान:
यह विशेष अभियान 2 अक्टूबर से शुरू होकर आगामी 14 नवंबर 2026 तक जोर-शोर से जारी रहेगा। स्वास्थ्य विभाग ने वैशाली के तमाम नागरिकों, अभिभावकों, आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य कर्मियों से इस मानवीय अभियान में सक्रिय रूप से सहयोग करने की अपील की है, ताकि जन्मजात बीमारियों से पीड़ित कोई भी बच्चा जरूरी इलाज से वंचित न रहे और एक उज्जवल भविष्य की ओर कदम बढ़ा सके।
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