डेंगू-चिकनगुनिया से बचाव व प्रबंधन पर डॉक्टरों का मंथन, फाइलेरिया नियंत्रण हेतु रात्रि रक्त पट्ट संग्रह की तैयारी
-बाहर से आने वाले बुखार पीड़ितों की होगी NS1 जांच, मरीज मिलने पर 48 घंटे में करानी होगी फॉगिंग
-घरों में जमा साफ पानी में पनपता है एडीज, आशा व एएनएम करेंगी ग्रामीणों को जागरूक
-जिले में इस वर्ष अब तक मिले 5 मामले, सभी मरीज बाहर से संक्रमित होकर आए
सीतामढ़ी। डेंगू एवं चिकनगुनिया से बचाव, रोकथाम व क्लीनिकल प्रबंधन के साथ-साथ फाइलेरिया नियंत्रण हेतु आगामी रात्रि रक्त पट्ट संग्रह (नाइट ब्लड सर्वे) की तैयारियों को लेकर शुक्रवार को जिला स्वास्थ्य समिति के सभागार में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता सिविल सर्जन डॉ. आर. के. यादव ने की।
बैठक में सदर अस्पताल के प्रशिक्षक डॉ. राजीव कुमार, जिले के सभी प्रखंडों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, प्रति प्रखंड दो-दो चिकित्सक, डीपीएम विजय चंद्र झा, वीडीसीओ प्रिंस कुमार, कमलेश कुमार, रजनीश कुमार तथा पीरामल फाउंडेशन के जिला प्रबंधक प्रभाकर कुमार, दुर्गा प्रसाद और रोहित कुमार सहित कई स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित थे।
मरीज मिलते ही गांव में फॉगिंग का निर्देश:
सिविल सर्जन डॉ. आर. के. यादव ने स्वास्थ्य पदाधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि बाहर से बुखार की शिकायत लेकर आने वाले हर संदिग्ध मरीज की अनिवार्य रूप से एन एस1 एंटीजन जांच कराई जाए। रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर गंभीरता के अनुरूप तुरंत इलाज शुरू हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस भी गांव या टोले से डेंगू का मामला सामने आए, वहां 24 से 48 घंटे के भीतर अनिवार्य रूप से फॉगिंग कराई जाए।
सामुदायिक जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव:
सीएस ने कहा कि डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर साफ और स्थिर पानी में पनपता है। इसके लिए फ्रिज की ट्रे, कूलर, गमले व टायरों में जमा पानी को नियमित खाली करना जरूरी है। प्रखंड स्तर पर तैनात आशा, सीएचओ एवं एएनएम का क्षमता वर्धन कर आमजन तक बचाव की जानकारी पहुंचाई जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने फाइलेरिया उन्मूलन के लिए तय आगामी रात्रि रक्त पट्ट संग्रह अभियान को सफल बनाने के लिए भी सभी प्रभारियों को सूक्ष्म कार्ययोजना बनाने का निर्देश दिया।
संक्रमण के लक्षण व प्रबंधन की दी जानकारी:
प्रशिक्षक डॉ. राजीव कुमार ने डेंगू व चिकनगुनिया के लक्षण, जांच, उपचार और क्लीनिकल प्रोटोकॉल की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एडीज मच्छर के प्रजनन स्थलों को नष्ट करना ही बीमारी की रोकथाम का सबसे प्रभावी उपाय है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिले में वर्ष 2025 में डेंगू के कुल 48 मामले दर्ज किए गए थे। वहीं वर्ष 2026 में अब तक केवल 5 मामले सामने आए हैं, जो सभी बाहरी क्षेत्रों से संक्रमित होकर जिले में पहुंचे हैं। स्वास्थ्य विभाग का मुख्य जोर त्वरित पहचान, मुकम्मल इलाज और समयबद्ध रोकथाम पर है।
No comments