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    रजौली में स्कूल संचालन पर सवाल, मध्यान्ह भोजन में गड़बड़ी के आरोप

    रजौली/नवादा। नवादा जिले के रजौली प्रखंड स्थित प्राथमिक विद्यालय सिमरातरी उर्दू के संचालन को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय निर्धारित समय के अनुसार संचालित नहीं हो रहा है और कथित तौर पर दोपहर 12 बजे के आसपास ही स्कूल बंद कर दिया जाता है। इससे विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की बात कही जा रही है।

    ग्रामीणों ने विद्यालय के प्रभारी करी मोबीन पर भी स्कूल संचालन को लेकर गंभीर नहीं रहने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का दावा है कि विद्यालय की व्यवस्था पर करी मोबिन द्वारा पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जिसके कारण स्कूल में नियमित पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है। वहीं, स्थानीय लोगों ने प्रभारी करी मोबीन पर मध्यान्ह भोजन योजना के संचालन में भी कथित गड़बड़ी का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों को मिलने वाले मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था और उसके संचालन की उचित निगरानी नहीं की जा रही है। ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग से मध्यान्ह भोजन से संबंधित अभिलेखों, भोजन की गुणवत्ता, बच्चों की संख्या तथा योजना के तहत उपलब्ध कराई जा रही सामग्री की जांच कराने की मांग की है।

    विद्यालय में कार्यरत सहायक शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। आरोप है कि कुछ शिक्षक नियमित रूप से विद्यालय नहीं आते हैं और कभी-कभार विद्यालय पहुंचने के बाद भी कथित तौर पर दोपहर के समय ही चले जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि शिक्षक नियमित रूप से विद्यालय में मौजूद नहीं रहेंगे तो बच्चों की पढ़ाई पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

    ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि संबंधित पंचायत के अन्य विद्यालयों में भी स्कूल संचालन और शिक्षकों की नियमित उपस्थिति को लेकर ऐसी शिकायतें सामने आती रही हैं। लोगों ने शिक्षा विभाग से पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराने और विद्यालयों में नियमित निरीक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

    ग्रामीणों ने मांग की है कि विद्यालय के खुलने और बंद होने के समय, शिक्षकों की उपस्थिति तथा मध्यान्ह भोजन योजना के संचालन की जांच की जाए। साथ ही, यदि जांच के दौरान किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

    फिलहाल, ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों पर शिक्षा विभाग अथवा संबंधित विद्यालय प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। स्थानीय लोगों की मांग है कि जांच निष्पक्ष तरीके से कराकर विद्यालय की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था में आवश्यक सुधार किया जाए।

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