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    100वें बैच की ऐतिहासिक रवानगी: स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने दिखाई हरी झंडी

    -मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के तहत वैशाली के बच्चों को मिला नया जीवन

    ​वैशाली। मुख्यमंत्री के सात निश्चय-2 के अंतर्गत संचालित महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना ने आज एक नया इतिहास रच दिया है। इस योजना के ऐतिहासिक 100वें बैच के अंतर्गत बिहार के कुल 32 बच्चों को हृदय संबंधी विशेष जांच एवं उच्चस्तरीय उपचार के लिए श्री सत्य साईं हृदय अस्पताल, अहमदाबाद भेजा जा रहा है। इस गौरवपूर्ण 100वें बैच में वैशाली जिले के भी 3 बच्चे शामिल हैं, जिन्हें बिहार सरकार के माननीय स्वास्थ्य मंत्री निशांत द्वारा पटना एयरपोर्ट से हरी झंडी दिखाकर शुभकामनाओं के साथ सी-ऑफ किया गया। स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने बच्चों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए इस मानवीय मिशन को राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया है।

    ​इस नए कीर्तिमान के साथ ही वैशाली जिला सर्वाधिक सर्जरी कराने वाले जिलों की सूची में पूरे बिहार में तीसरे नंबर पर पहुंच गया है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) एवं जिला स्वास्थ्य समिति, वैशाली के सतत प्रयासों से अब तक जिले के कुल 176 बाल हृदय रोग से पीड़ित बच्चों की सफल सर्जरी कराई जा चुकी है। यह उपलब्धि न केवल जिले के लिए बल्कि पूरे राज्य के लिए एक गौरवपूर्ण मिसाल है, जो यह दर्शाती है कि समय पर सही पहचान और सरकारी तंत्र के मजबूत सहयोग से बच्चों को एक स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य दिया जा सकता है।

    ​इस विशेष अवसर पर वैशाली जिले के चयनित बच्चों को जिला स्वास्थ्य समिति से 102 एम्बुलेंस के माध्यम से पूरे सम्मान और सुरक्षा के साथ राज्य स्वास्थ्य समिति, पटना भेजा गया। वहाँ से आवश्यक प्रशासनिक और चिकित्सकीय प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद इन बच्चों को विमान द्वारा अहमदाबाद के लिए रवाना किया जा रहा है। इस रवानगी के मौके पर जिला स्वास्थ्य समिति में डॉ. शाइस्ता (डी.इ.आई.सी प्रबंधक-सह-समन्वयक आरबीएसके), डॉ. अंजनी मिश्रा, डॉ. कुमार सौरव, डॉ. राकेश साव (चिकित्सा पदाधिकारी आरबीएसके) और फार्मासिस्ट अभिषेक कुमार मुख्य रूप से उपस्थित रहे, जिन्होंने बच्चों और उनके अभिभावकों को संबल प्रदान किया।

    ​सिविल सर्जन वैशाली ने इस संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार आर्थिक रूप से कमजोर और असहाय परिवारों के बच्चों को समय पर बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जन्मजात हृदय रोग के साथ-साथ चर्म रोग, दंत रोग, नेत्र रोग, श्वसन संबंधी विकार, जन्मजात विकलांगता, और कटे होंठ एवं तालु जैसी गंभीर बीमारियों का भी निःशुल्क उपचार सुनिश्चित किया जाता है।

    ​इसी क्रम में जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. कुमार मनोज और डीसी-आरबीएसके डॉ. शाइस्ता ने संयुक्त रूप से कहा कि यह योजना उन परिवारों के लिए एक वरदान और नई उम्मीद की किरण बनकर उभरी है, जो आर्थिक तंगी के कारण अपने बच्चों का महंगा इलाज कराने में असमर्थ थे। अधिकारियों ने आम जनता से यह भावुक अपील भी की है कि यदि किसी भी बच्चे में जन्मजात हृदय रोग या अन्य किसी गंभीर बीमारी के लक्षण दिखाई दें, तो वे तुरंत अपने निकटतम स्वास्थ्य केंद्र अथवा आरबीएसके टीम से संपर्क करें ताकि कोई भी बच्चा पैसों की कमी की वजह से इलाज से वंचित न रहे। यह 176 सफल ऑपरेशन सिर्फ एक सरकारी आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह उन 176 गरीब परिवारों की खोई हुई मुस्कान और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की एक जीती-जागती कहानी है।

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