टीकाकरण जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर सीओपी-डी कमेटी का गठन
-बैरिया प्रखंड के सिसवा सरैया और तुमकड़िया पंचायत में हुई पहल
-हर परिवार तक टीकाकरण की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए बनी कार्ययोजना
-टीकाकरण केंद्रों की सुविधाओं में सुधार और वंचित परिवारों को जागरूक करने पर जोर
बेतिया। पश्चिम चम्पारण जिले के बैरिया प्रखंड अंतर्गत सिसवा सरैया एवं तुमकड़िया ग्राम पंचायत में टीकाकरण जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कम्युनिटी ऑफ प्रैक्टिस फॉर डिमांड (सीओपी-डी) कमेटी का गठन किया गया। इस पहल की अध्यक्षता क्रमशः सिसवा सरैया पंचायत के मुखिया शौकत अली एवं तुमकड़िया पंचायत के मुखिया जय दीप कुमार ने की।
इस कमेटी का उद्देश्य गांव के प्रत्येक परिवार तक नियमित टीकाकरण की पहुंच सुनिश्चित करना तथा टीकाकरण से वंचित परिवारों को जागरूक कर अभियान से जोड़ना है। सिसवा सरैया पंचायत में गठित कमेटी में 16 आशा कार्यकर्ता, 15 आंगनबाड़ी सेविका, 8 जीविका कम्युनिटी मोबिलाइजर, 1 सीएनआरपी दीदी, 5 एएनएम एवं 15 वार्ड सदस्यों सहित कुल 60 सदस्य शामिल किए गए। वहीं तुमकड़िया पंचायत में 6 आशा, 9 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, 6 जीविका कम्युनिटी मोबिलाइजर, 1 सीएनआरपी, 3 एएनएम तथा 9 वार्ड सदस्यों सहित कुल 33 सदस्य शामिल हुए।
बैठक के दौरान सभी सदस्यों ने मिलकर पंचायत स्तर पर टीकाकरण की शत-प्रतिशत उपलब्धि सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की। साथ ही टीकाकरण केंद्रों पर बैठने, पेयजल और वेंटिलेशन जैसी मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने का भी निर्णय लिया गया। दोनों मुखियाओं ने भरोसा दिलाया कि पंचायत के सभी टीकाकरण केंद्रों को सुविधायुक्त बनाने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
बैठक में टीकाकरण से इनकार करने वाले परिवारों की सूची पर भी विस्तार से चर्चा हुई। तय किया गया कि कमेटी के सदस्य एक साथ इन परिवारों से संपर्क करेंगे, उन्हें टीकाकरण के महत्व के बारे में जानकारी देंगे और बच्चों को टीकाकरण से जोड़ने के लिए प्रेरित करेंगे। इसके लिए आगामी एक सप्ताह बाद पंचायत के प्रत्येक वार्ड में खुली बैठक आयोजित की जाएगी।
जिला स्तर पर इस पहल को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्थानीय लोगों ने इसे सराहनीय प्रयास बताते हुए कहा कि इससे गांवों में टीकाकरण को लेकर जागरूकता बढ़ेगी और कोई भी बच्चा टीकाकरण से वंचित नहीं रहेगा। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार यह पहल पश्चिम चम्पारण ही नहीं बल्कि बिहार के लिए भी एक अनुकरणीय मॉडल बन सकती है।
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