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    कालाजार उन्मूलन में सीतामढ़ी ने रचा इतिहास, सस्टेनेन्स व डोजियर प्रिपरेशन पर भव्य जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित

    -जानलेवा कालाजार से जंग जीता सीतामढ़ी, जमीनी योद्धाओं के साहस से मिली बड़ी कामयाबी

    -माइक्रो-प्लानिंग और सामुदायिक सहभागिता ने बदली तस्वीर

    -उन्मूलन के बाद अब देश के लिए बनेगा 'मॉडल जिला'

    -डीएम और विधायक ने कार्यशाला में स्वास्थ्य कर्मियों को किया सम्मानित

    सीतामढ़ी। देवी सीता की जन्मस्थली सीतामढ़ी, जो कभी कालाजार जैसी जानलेवा बीमारी से बुरी तरह प्रभावित थी, आज न केवल कालाजार मुक्त जिला बन चुकी है, बल्कि उन्मूलन के बाद उसके सतत् संरक्षण और प्रभावी दस्तावेजीकरण के क्षेत्र में भी एक राष्ट्रीय मॉडल के रूप में उभर रही है। इसी क्रम में कालाजार उन्मूलन की उपलब्धियों, चुनौतियों और भविष्य की रणनीतियों को साझा करने के उद्देश्य से एक निजी होटल, सीतामढ़ी में एक दिवसीय जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

    कार्यशाला की संयुक्त अध्यक्षता जिला पदाधिकारी रिची पाण्डेय एवं विधायक सह सचेतक परिहार गायत्री देवी ने की। कार्यक्रम में भारत सरकार के आरओएचएफडब्ल्यू (क्षेत्रीय परिवार कल्याण संस्थान,भारत सरकार, बिहार एवं झारखंड) के निदेशक डॉ रविशंकर सिंह, सिविल सर्जन सीतामढ़ी डॉ अखिलेश कुमार, डब्ल्यूएचओ के एनटीडी राज्य समन्वयक, डॉ राजेश पाण्डेय, जोनल कॉर्डिनेटर डॉ माधुरी देवराजू, जिला भीबीडी नियंत्रण पदाधिकारी डॉ आर के यादव, पीरामल फाउंडेशन के जिला प्रबंधक प्रभाकर कुमार एवं कार्यक्रम लीड रोहित कुमार की गरिमामयी उपस्थिति रही।

    जिला पदाधिकारी का संबोधन:

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला पदाधिकारी रिची पाण्डेय ने कहा कि “सीतामढ़ी का कालाजार मुक्त होना केवल एक स्वास्थ्य उपलब्धि नहीं, बल्कि यह प्रशासनिक प्रतिबद्धता, विभागीय समन्वय और सामुदायिक सहभागिता की सफलता की कहानी है। उन्मूलन के बाद सबसे बड़ी जिम्मेदारी इसे बनाए रखना है, जिसके लिए निरंतर निगरानी, समय पर जांच, गुणवत्तापूर्ण आईआरएस और व्यवहार परिवर्तन आवश्यक है।”

    उन्होंने कहा कि डोजियर प्रिपरेशन के माध्यम से जिले के अनुभवों, नवाचारों और अच्छे अभ्यासों को संकलित कर अन्य जिलों के लिए सीख के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।


    विधायक परिहार गायत्री देवी का संबोधन:

    विधायक सह सचेतक परिहार गायत्री देवी ने कहा कि “कालाजार जैसी बीमारी समाज के सबसे गरीब और वंचित वर्ग को प्रभावित करती है। ऐसे में इसका उन्मूलन सामाजिक न्याय का भी विषय है। मुख्यमंत्री कालाजार राहत योजना के तहत दी जाने वाली ₹6600 की प्रोत्साहन राशि ने मरीजों को आगे आने और समय पर इलाज कराने के लिए प्रेरित किया।”

    उन्होंने आशा कार्यकर्ताओं, छिड़काव कर्मियों और जमीनी स्तर पर काम कर रहे स्वास्थ्य कर्मियों की सराहना करते हुए कहा कि इन्हीं के प्रयासों से आज सीतामढ़ी को यह गौरव प्राप्त हुआ है।


    डॉ आर के यादव ने सुनाई कालाजार उन्मूलन की विस्तृत कहानी:

    कार्यशाला में जिला भीबीडी नियंत्रण पदाधिकारी डॉ आर के यादव ने कालाजार उन्मूलन की पूरी यात्रा को विस्तार से साझा किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2011 में जिले में कालाजार के 1299 मामले और 12 मौतें दर्ज की गई थीं। उस समय सबसे बड़ी चुनौती थी-लोगों में जागरूकता की कमी, सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर अविश्वास और लंबे व दर्दनाक इलाज का डर।

    डॉ यादव ने बताया कि आरके-39 रैपिड टेस्ट, मौखिक दवा मिल्टेफोसिन और सिंगल डोज एम्बिसोम के उपयोग से इलाज को सरल बनाया गया। साथ ही सैंड फ्लाई के नियंत्रण के लिए आईआरएस को मिशन मोड में लागू किया गया। माइक्रो-प्लानिंग, घर-घर सर्वे, आशा और छिड़काव कर्मियों की नियमित निगरानी, रियल-टाइम डाटा रिव्यू और अंतरविभागीय समन्वय ने कार्यक्रम को मजबूती दी।

    उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में ही सभी प्रखंडों में प्रति 10,000 जनसंख्या पर एक से कम मामला दर्ज कर भारत सरकार का उन्मूलन लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया, जिसे आज तक सफलतापूर्वक बनाए रखा गया है।

    पीरामल फाउंडेशन ने डॉ यादव के नवाचारों की सराहना की

    पीरामल फाउंडेशन के जिला प्रबंधक प्रभाकर कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि “सीतामढ़ी में कालाजार उन्मूलन की सफलता के पीछे डॉ आर के यादव के नेतृत्व में किए गए नवाचार, डेटा-आधारित निर्णय, फील्ड-लेवल मॉनिटरिंग और फ्रंटलाइन वर्कर्स के साथ सतत संवाद की अहम भूमिका रही है।”

    उन्होंने कहा कि माइक्रो-लेवल प्लानिंग, हॉट-स्पॉट आधारित आईआरएस, छिपे हुए मरीजों की पहचान और समुदाय-आधारित व्यवहार परिवर्तन रणनीतियों ने सीतामढ़ी को अन्य जिलों के लिए एक सीखने योग्य मॉडल बनाया है।

    आकांक्षी जिला कार्यक्रम में स्वर्ण पदक पर सभी की सराहना

    कार्यक्रम के दौरान नीति आयोग के आकांक्षी जिला कार्यक्रम के अंतर्गत स्वास्थ्य सहित कई सूचकांकों में शत-प्रतिशत उपलब्धि प्राप्त करने पर सीतामढ़ी जिले को मिले स्वर्ण पदक का भी विशेष उल्लेख किया गया। जिला पदाधिकारी, विधायक एवं अतिथियों ने इसे सभी विभागों, स्वास्थ्य कर्मियों, विकास साझेदारों और फील्ड-लेवल कार्यकर्ताओं के सामूहिक प्रयास का परिणाम बताया।

    कार्यक्रम में डीपीएम असित रंजन, डीपीसी दिनेश कुमार, जिला अनुश्रवण एवं मूल्यांकन पदाधिकारी संतोष कुमार, डीसी (आरबीएसके) प्रतीक यादव, डीएएम गौरव कुमार, राहुल कुमार सिंह, प्रियरंजन, जिला भीबीडी कार्यालय से भीडीसीओ प्रिंस कुमार, पवन कुमार, एफएलए  रजनीश कुमार, कमलेश कुमार, सभी भीबीडीएस, पीरामल टीम से विक्रम कुमार, गांधी फेलो दिव्या चौहान सहित जिले के सभी प्रखंडों से प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक, प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक, सदर अस्पताल, एसडीएच बेलसंड एवं पुपरी के अस्पताल उपाधीक्षक व प्रबंधक तथा कालाजार उन्मूलन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले आशा एवं छिड़काव कर्मी उपस्थित रहे।

    कार्यक्रम के समापन अवसर पर जिला पदाधिकारी रिची पाण्डेय एवं विधायक परिहार गायत्री देवी द्वारा कालाजार उन्मूलन में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पदाधिकारियों, कर्मियों एवं सहयोगी संस्थाओं डब्ल्यूएचओ और पीरामल फाउंडेशन के सदस्यों को प्रशस्ति पत्र एवं मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया।

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