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    टीबी के खिलाफ निर्णायक जंग: मुजफ्फरपुर में 9 हजार से अधिक मरीजों की पहचान, पंचायतों में छिड़ा महाभियान

    -560 टीबी चैंपियंस संभालेंगे कमान

    -9300 मरीजों की पहचान

    मुजफ्फरपुर। जिले को टीबी मुक्त बनाने के संकल्प के साथ स्वास्थ्य विभाग ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अब यह लड़ाई केवल अस्पतालों तक सीमित न रहकर सीधे ग्राम पंचायतों की चौखट तक पहुँच गई है। विभाग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, जिले में टीबी मरीजों की पहचान (नोटिफिकेशन) के मामले में निजी और सरकारी क्षेत्र के तालमेल ने नई उम्मीद जगाई है।

    विगत एक वर्ष की अवधि में जिले के स्वास्थ्य तंत्र ने व्यापक सक्रियता दिखाते हुए कुल 9300 मरीजों को मुख्यधारा के उपचार से जोड़ा है। इसमें सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से 3800 मरीजों का नोटिफिकेशन हुआ है, जबकि निजी चिकित्सकों और अस्पतालों के सहयोग से सर्वाधिक 5500 मरीजों की पहचान की गई है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के लिए 200 एमडीआर (मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट) टीबी मरीजों की मौजूदगी एक गंभीर विषय है, जिनके विशेष उपचार और नियमित फॉलोअप के लिए अब पंचायत स्तर पर विशेष निगरानी तंत्र विकसित किया जा रहा है।

    पंचायतों में प्रशिक्षण का महाजाल:

    टीबी मुक्त पंचायत के सपने को धरातल पर उतारने के लिए जिले के 16 प्रखंडों की 373 ग्राम पंचायतों को केंद्र में रखा गया है। इन पंचायतों के जनप्रतिनिधियों को इस बीमारी की रोकथाम और मरीजों की मदद के लिए विधिवत प्रशिक्षित किया गया है। इसके अतिरिक्त, समुदाय के बीच से ही 560 टीबी चैंपियंस को तैयार किया गया है, जो गांव-गांव जाकर मरीजों को दवा के प्रति प्रोत्साहित कर रहे हैं और समाज में फैली भ्रांतियों को मिटा रहे हैं।

    14 हजार से अधिक लोग हुए दक्ष:

    अभियान की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिले में अब तक कुल 14,420 लोगों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। इसमें पंचायत प्रतिनिधि, आशा कार्यकर्ता और स्वास्थ्य कर्मी शामिल हैं। विभाग वर्तमान में टीबी मुक्त पंचायत के दावों के सत्यापन की प्रक्रिया में जुटा है, ताकि मानक पूरा करने वाली पंचायतों को आधिकारिक रूप से पुरस्कृत और प्रमाणित किया जा सके।

    अधिकारियों का कहना है कि एमडीआर मरीजों की संख्या को देखते हुए अब 'डॉट्स' केंद्रों को और अधिक सक्रिय किया गया है। पंचायत प्रतिनिधियों और प्रशिक्षित चैंपियंस का यह साझा मोर्चा मुजफ्फरपुर को इस बीमारी से निजात दिलाने में मील का पत्थर साबित होगा।

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