जिला में 89.4 प्रतिशत नवजात को जन्म के एक घंटे के भीतर मिला मां का पहला स्तनपान
-जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान सुनिश्चित कराने की कवायद से शिशु मृत्यु दर कम करने का प्रयास
गया: शिशु मृत्यु दर को कम करने स्वास्थ्य विभाग की अलग—अलग कवायदों में एक महत्वपूर्ण कवायद नवजात को एक घंटे के भीतर स्तनपान सुनिश्चित कराना भी शामिल है। जिला के सभी प्रखंडों के सामुदायिक तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सहित अनुमंडलीय व जिला अस्पताल में नवजात को एक घंटे के अंदर स्तनपान सुनिश्चित कराने पर जोर है। नर्सिंग स्टॉफ को इसके लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिये गये हैं कि सामान्य प्रसव होने के एक घंटे के अंदर यह सुनिश्चित किया जाये कि नवजात मां का पहला स्तनपान आवश्यक रूप से करे। स्वास्थ्य विभाग के एक घंटे के भीतर नवजात के स्तनपान से संंबंधित आंकड़े बताते हैं कि कई प्रखंडों के स्वास्थ्य केंद्र नवजात को एक घंटे के अंदर पहला स्तनपान सुनिश्चित कराने में बेहतर कर रहे हैं।
89.4 प्रतिशत नवजात को एक घंटे के अंदर स्तनपान:
डीपीएम स्वास्थ्य नीलेश कुमार कहते हैं कि बीते वर्ष अप्रैल से दिसंबर के बीच जिला में कुल 54 हजार 836 नवजात हुए जिनमें 49 हजार 070 नवजात यानि कुल 89.4 प्रतिशत नवजात को जन्म के एक घंटे के अंदर स्तनपान सुनिश्चित कराया गया। इस मामले में परैया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शीर्ष पर है। यहां 709 नवजात हुए और सभी को जन्म के एक घंटे के अंदर स्तनपान सुनिश्चित कराया गया। बताया कि अन्य 22 प्रखंडों में नवजात का एक घंटे के अंदर स्तनपान सुनिश्चित कराने का प्रतिशत 95 से उपर रहा है। हालांकि सबसे कम डुमरिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में महज 64 फीसदी नवजात को ही जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान सुनिश्चित किया जा सका। प्रभावती अस्पताल में 94 प्रतिशत जबकि जेपीएन सदर अस्पताल में 67 प्रतिशत नवजात को एक घंटा के अंदर स्तनपान सुनिश्चित किया जा सका। मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 79 प्रतिशत ऐसे नवजात रहे जिन्हें एक घंटे के अंदर स्तनपान मिल सका।
एक घंटा के अंदर स्तनपान से जच्चा बच्चा को फायदा:
गुरुआ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की नर्सिंग स्टॉफ श्वेता रश्मि कहती हैं कि सामान्य प्रसव के बाद यदि नवजात स्वस्थ्य है तो उसे एक घंटा के भीतर स्तनपान करा दिया जाता है। नवजात मां का जितना स्तनपान करता है उससे मां के स्वास्थ्य को उतना ही फायदा होता है। प्रसव के बाद नवजात को तुरंत स्तनपान कराने से ब्लीडिंग कम होता है और बच्चेदानी में संकुचन जल्द होता है जिससे मां तुरंत स्वस्थ्य होने लगती है। स्तनपान से आॅक्सीटोसीन का प्रवाह बढ़ जाता है। हर गर्भवती को प्रसव पूर्व जांच से ही स्तनपान के फायदों पर जानकारी दी जाती है। इससे प्रसूता स्तनपान के लाभ के बारे में सजग रहती है।
आखिर क्यों जरूरी है एक घंटा के अंदर स्तनपान:
स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ एमई हक ने बताया कि मां का पहला दूध जोकि कोलोस्ट्रम कहलाता है, और पीला रंग लिए गाढ़ा होता है यह पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले तत्व, प्रोटीन, विटामिन, और अच्छे बैक्टीरिया प्रचुर मात्रा में होते हैं। यह शिशु की इम्यूनिटी को मजबूत कर उसे संक्रमण से बचाते हैं और उसके विकास के लिए ज़रूरी होते हैं।
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