कुढ़नी अस्पताल में अब घर की दहलीज नहीं, अस्पताल की सुरक्षा चुन रही हैं महिलाएं
-ममता-चौपाल के भरोसे ने बदली पुरानी सोच, अब गाँव-गाँव गूँज रहा सुरक्षित मातृत्व का संदेश
-नियोजित बड़े ऑपरेशन और चुस्त एम्बुलेंस सेवा से जटिल मामलों में भी सुरक्षित बच रही जान
मुजफ्फरपुर: मुजफ्फरपुर जिले के कुढ़नी प्रथम रेफरल इकाई (एफआरयू) ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में एक नई मिसाल पेश की है। यहाँ सफल ऑपरेशन के बाद स्वस्थ बच्चे को गोद में लिए एक लाभार्थी संजू कुमारी खुशी के साथ कहती हैं, "शुरुआत में हम जटिल मामला जानकर बहुत डरे हुए थे और निजी अस्पताल जाने की सोच रहे थे, लेकिन यहाँ ममता-चौपाल में स्वास्थ्य दीदियों ने हमें भरोसा दिलाया। अस्पताल में मेरा सुरक्षित बड़ा ऑपरेशन हुआ और हमें सारी दवाइयां व भोजन भी निःशुल्क मिला। अब हमें इलाज के लिए बाहर भटकने की जरूरत नहीं है।" लाभार्थी का यह अटूट विश्वास ही कुढ़नी अस्पताल की असली कामयाबी है, जहाँ न केवल अस्पताल में प्रसव (संस्थागत प्रसव) की संख्या में भारी उछाल आया है, बल्कि जटिल मामलों में नियोजित बड़े ऑपरेशन और बेहतरीन भेजने की व्यवस्था (रेफरल सुविधा) ने माता और शिशु की सुरक्षा को नया आयाम दिया है।
आँकड़ों में दिख रहा बड़ा बदलाव:
अस्पताल के हालिया आँकड़े इस बदलाव की गवाही देते हैं। पिछले कुछ समय में कुढ़नी में अस्पताल में प्रसव की दर में काफी वृद्धि दर्ज की गई है। जनवरी 2025 से अभी तक कुढ़नी एफआरयू में 2916 सुरक्षित प्रसव कराए जा चुके है। वर्तमान में हर महीने औसतन 225 से 250 गर्भवती महिलाएं सुरक्षित प्रसव के लिए इस केंद्र पर भरोसा जता रही हैं। इनमें से कई ऐसे जटिल मामले होते हैं जिनमें समय रहते बड़े ऑपरेशन की योजना बनाई जाती है, जिससे माँ और बच्चे दोनों की जान बचाई जा रही है।
ममता-चौपाल: भरोसे की नींव
इस सफलता के पीछे 'ममता-चौपाल' का बड़ा हाथ है। स्वास्थ्य कर्मियों की टीम गाँवों के टोलों में जाकर उन परिवारों से बात करती है जो अस्पताल आने से हिचकिचाते थे। इन चौपालों के जरिए न केवल लोगों की पुरानी सोच बदली गई, बल्कि जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहले ही पहचान कर उनके लिए नियोजित बड़े ऑपरेशन की तैयारी सुनिश्चित की जाने लगी।
रेफरल व्यवस्था: समय पर इलाज, जीवन की गारंटी
डीपीएम रेहान अशरफ ने बताया कि कुढ़नी अस्पताल की एक और बड़ी ताकत यहाँ की चुस्त-दुरुस्त रेफरल प्रणाली है। यदि कोई मामला बहुत अधिक गंभीर होता है, तो बिना समय गँवाए सरकारी एम्बुलेंस की व्यवस्था की जाती है और जिला अस्पताल को पहले ही सूचित कर दिया जाता है ताकि मरीज के पहुँचते ही तुरंत इलाज शुरू हो सके। इस आपसी तालमेल ने रास्ते में होने वाली कठिनाइयों को लगभग समाप्त कर दिया है।
नेतृत्व और कुशल प्रबंधन का साझा प्रयास:
अस्पताल की इस उपलब्धि पर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रीता रेणु चौधरी और स्वास्थ्य प्रबंधक दिलीप कुमार ने संयुक्त रूप से बताया कि, "हमारा सामूहिक लक्ष्य कुढ़नी के हर घर तक सुरक्षित प्रसव का संदेश पहुँचाना है। अस्पताल में अब 24 घंटे विशेषज्ञ डॉक्टरों और बड़े ऑपरेशन की सुविधा सुनिश्चित की गई है, जहाँ जटिल मामलों में पहले से योजना बनाकर प्रसव कराया जाता है ताकि जच्चा-बच्चा दोनों पूरी तरह सुरक्षित रहें। ममता-चौपाल ने समाज और अस्पताल के बीच की दूरी को खत्म कर दिया है और हमारी रेफरल व्यवस्था इतनी सक्रिय है कि किसी भी आपातकालीन स्थिति में मरीज को एक पल की भी देरी नहीं होने दी जाती। हमारी पूरी टीम संवेदनशीलता के साथ हर मरीज की सेवा में समर्पित है।"
सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ते कदम:
कुढ़नी एफआरयू ने यह साबित कर दिया है कि यदि इच्छाशक्ति और सही प्रबंधन हो, तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी उत्कृष्ट स्वास्थ्य सुविधा दी जा सकती है। बढ़ते आँकड़े, डॉ. रीता रेणु चौधरी का कुशल नेतृत्व और लोगों का यह नया भरोसा इस बात का प्रमाण है कि कुढ़नी अब सुरक्षित मातृत्व का गढ़ बन चुका है।
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