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    माननीय स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पाण्डेय द्वारा ऊर्जा ऑडिटोरियम, शास्त्रीनगर, पटना में मेगा सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान का शुभारंभ किया गया

    पटना। माननीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि भारत सरकार द्वारा वर्ष 2027 तक फाइलेरिया रोग को पूर्णतः समाप्त करने का राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किया गया है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व एवं माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में बिहार सरकार ने वर्ष 2027 तक राज्य को फाइलेरिया मुक्त बनाने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है।

    माननीय स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पाण्डेय ने कहा कि 10 फरवरी से 27 फरवरी 2026 तक राज्य के 34 जिलों के 397 प्रखंडों में सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान संचालित किया जाएगा। अभियान के तहत 11 फरवरी 2026 को “मेगा डे” के रूप में मनाया जाएगा, जिसमें एक ही दिन में एक करोड़ लोगों को फाइलेरिया रोधी दवा सेवन कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वर्तमान में राज्य में 1.58 लाख फाइलेरिया के मरीज चिन्हित हैं।

    माननीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इस मेगा अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए राज्य भर में लगभग चार लाख प्रशिक्षित फ्रंटलाइन कार्यकर्ता तैनात किए जाएंगे तथा 397 प्रखंडों में 40 हजार से अधिक बूथ सक्रिय किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि 11 फरवरी को मेगा एमडीए के दौरान सभी स्वास्थ्य कर्मी ‘वॉर मोड’ में कार्य करेंगे, ताकि कोई भी लक्षित व्यक्ति दवा सेवन से वंचित न रह जाए।


    श्री मंगल पाण्डेय ने फाइलेरिया से संबंधित हाइड्रोसिल रोग के उपचार में बिहार की उपलब्धियों को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि पिछले एक वर्ष में राज्य में लगभग 18 हजार से अधिक हाइड्रोसिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए गए हैं और जुलाई 2026 तक हाइड्रोसिल को पूरी तरह समाप्त करने के लक्ष्य के साथ स्वास्थ्य विभाग कार्य कर रहा है।


    इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री लोकेश कुमार सिंह ने कहा कि 11 फरवरी 2026 को आयोजित मेगा एमडीए अभियान की सफलता में स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ पंचायती राज विभाग, महिला एवं बाल विकास निगम, समाज कल्याण विभाग, शिक्षा विभाग एवं बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति की महत्वपूर्ण भूमिका सुनिश्चित की गई है। अभियान को सफल बनाने के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों पर मेगा कैंप लगाए जाएंगे, आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर दवा खिलाएगी, जबकि जीविका दीदियां जनजागरूकता फैलाने में अहम भूमिका निभाएंगी। इसके साथ ही प्रखंड स्तर पर प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) एवं प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा संयुक्त रूप से माइक्रो प्लानिंग की जाएगी, ताकि शत-प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि अपने सामने सभी को दवा खिलाना सबसे बड़ी चुनौती है और सभी को प्रयास करना है कि दवा सामने खिलायी जाए। अभियान की सफलता में जीविका समूह की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी और इनका सहयोग लेकर अभियान को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकता है।

    कार्यक्रम में अपने संबोधन में अमित कुमार पांडेय, कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार ने कहा कि 397 प्रखंडों में लगभग 40,000 बूथ का संचालन कर अभियान को सफल बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि अभियान की सफलता के लिए अंतर्विभागीय सहयोग बहुत जरुरी है। उन्होंने कहा कि आईसीडीएस के 2.10 लाख सेविका/सहायिका हैं और करीब 1.15 आंगनवाड़ी केंद्र संचालित हैं. अभियान की सफलता में इनकी भूमिका और सहयोग भी महत्वपूर्ण रहेगी।

    आयोजित इस कार्यक्रम के अवसर पर श्री लोकेश कुमार सिंह, सचिव, स्वास्थ्य विभाग, श्री अमित कुमार पाण्डेय, कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति, श्री अमिताभ सिंह, आप्त सचिव, स्वास्थ्य मंत्री, श्री राजेश कुमार, प्रशासी पदाधिकारी, राज्य स्वास्थ्य समिति, डॉ  रवि शंकर सिंह, निदेशक, ROHFW, डॉ श्यामा राय, स्टेट प्रोग्राम ऑफिसर फ़ाइलेरिया, विकास सिन्हा CTM, पीरामल, बसब रूज प्रोग्राम निदेशक, डॉ राजेश पाण्डेय  WHO के साथ स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मी मौजूद रहे।

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