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    मुजफ्फरपुर की मिसाल: अस्पताल नहीं पहुंच पाईं माताएं, तो घर तक पहुंची 'सुरक्षित गोद'

    -यह पहल स्वेच्छा पर नहीं, बल्कि स्थिति आधारित है  

    -स्किल बर्थ अटेंडेंट ने कराए कुल 308 सफल घरेलु प्रसव

    मुजफ्फरपुर। प्रसव की पीड़ा और अस्पताल से मीलों की दूरी... ग्रामीण इलाकों में यह फासला अक्सर मां और बच्चे की जान पर भारी पड़ता था। लेकिन मुजफ्फरपुर जिले में अब यह तस्वीर बदल रही है। '7-सी' फॉर्मूले और विशेष प्रशिक्षण से लैस नर्सें अब उन घरों तक पहुँच रही हैं, जहाँ से अस्पताल पहुँचना संभव नहीं है। अकुशल दाइयों के जोखिम भरे पारंपरिक तरीकों को पीछे छोड़ते हुए, जिले की 'स्किल बर्थ अटेंडेंट' सुरक्षित मातृत्व का नया अध्याय लिख रही हैं। जिले में आपातकालीन स्थितियों में स्किल बर्थ अटेंडेंट के माध्यम से 308 सुरक्षित घरेलू प्रसव कराकर विभाग ने अपनी सक्रियता दिखाई है। 

    नवंबर माह में जिले भर में कुल 23,237 नई गर्भवती महिलाओं का एएनसी के लिए पंजीकरण किया गया। इसमें एक सकारात्मक पहलू यह है कि 16,154 महिलाओं ने गर्भावस्था की पहली तिमाही के भीतर ही अपना पंजीकरण करा लिया, जो स्वास्थ्य जागरूकता को दर्शाता है। वहीं, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था  की पहचान करने में भी विभाग सक्रिय रहा है, और कुल 346 ऐसी महिलाओं की पहचान की गई है जिन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नवंबर माह में कुल 6,075 संस्थागत प्रसव कराए गए। इनमें से एसकेएमसीएच और निजी अस्पतालों में सिजेरियन डिलीवरी  की संख्या 925 रही। 

    अकुशल दाइयों के भरोसे नहीं, अब 'स्किल बर्थ अटेंडेंट' आ रहीं काम: 

    अब तक ग्रामीण इलाकों में अचानक प्रसव पीड़ा होने पर लोग अकुशल दाइयों का सहारा लेते थे, जिससे संक्रमण और पीपीएच (प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव) का खतरा बना रहता था। इस जोखिम को खत्म करने के लिए जिले में नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थापित स्किल बर्थ अटेंडेंट उनके घर पर जाकर सुरक्षित प्रसव कराती हैं। यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह स्वेच्छा पर नहीं, बल्कि स्थिति पर आधारित है। स्वास्थ्य विभाग का अभी भी लक्ष्य शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव ही है, लेकिन जो महिलाएं किसी कारणवश अस्पताल नहीं पहुंच पातीं, उन्हें मौत के मुंह में जाने से बचाने के लिए यह 'एसबीए रिफॉर्म' एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर रहा है। 

    '7-सी' फॉर्मूला का पालन करती हैं नर्स: 

    एसबीए नर्सों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है कि वे घर की परिस्थितियों में भी अस्पताल जैसी स्वच्छता सुनिश्चित करें। इसके लिए '7-सी' सिद्धांत को अनिवार्य बनाया गया है। इनमें साफ हाथ, साफ सतह, साफ धागा, साफ ब्लेड, साफ नाल, साफ तौलिया और साफ पानी। पीपीएच रोकने के लिए विशेष प्रोटोकॉल

    बिहार में मातृ मृत्यु का सबसे बड़ा कारण प्रसव के बाद होने वाला ब्लीडिंग है। इस रिफॉर्म के तहत नर्सों को प्रसव के थर्ड स्टेज के प्रबंधन में भी दक्ष किया गया है। इसके तहत आक्सिटोसिन का उपयोग, पार्टोग्राफ तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है।

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