बिहार के बुनियाद केंद्रों में सुविधाएं देने वाले कर्मियों का ही बुरा हाल, नौ वर्षों से नियुक्ति की प्रक्रिया अधर में
पटना। राज्य के वृद्धजनों, विधवा महिलाओं एवं दिव्यांगजनों को सामाजिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से समाज कल्याण विभाग द्वारा वर्ष 2017 से बिहार के सभी 38 जिलों के 101 अनुमंडलों में बुनियाद केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। इन केंद्रों के माध्यम से लाभार्थियों को फिजियोथेरेपी, आंखों की जांच एवं नि:शुल्क चश्मा, कान की जांच, सहायक उपकरण सहित कई महत्वपूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
बुनियाद केंद्रों के माध्यम से हजारों जरूरतमंद लोगों तक सेवाएं पहुंचाने में लगभग 500 संविदाकर्मी 10 वर्षों से लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं। हालांकि, इन कर्मियों का कहना है कि समय पर मानदेय का भुगतान नहीं होने तथा लंबे समय से मानदेय में अपेक्षित वृद्धि नहीं होने के कारण उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। जिसके कारण लगभग 500 कर्मी बुनियाद छोड़ चुके हैं।वर्षों से सेवा देने के बावजूद कर्मियों की सेवा संबंधी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।
2019 में स्वीकृत 1465 पदों पर अब तक नियुक्ति नहीं:
बुनियाद केंद्रों में फिजियोथेरेपिस्ट, ऑडियोलॉजिस्ट, टेक्नीशियन, ऑप्थेलमिक संबंधी कर्मी, साइकोलॉजिस्ट सहित विभिन्न महत्वपूर्ण पदों के लिए कुल 1465 स्थायी पदों के सृजन एवं नियुक्ति की स्वीकृति वर्ष 2019 में बिहार कैबिनेट द्वारा दी गई थी। इसके बावजूद, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो सकी है।
इस स्थिति से बुनियाद केंद्रों में कार्यरत संविदाकर्मियों में निराशा है। कर्मियों का कहना है कि जब सरकार ने स्थायी पदों के सृजन की स्वीकृति कई वर्ष पहले दे दी थी, तो नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में इतनी लंबी देरी क्यों हो रही है।
सरकार से कर्मियों की समस्याओं के समाधान की मांग:
बुनियाद केंद्रों में कार्यरत कर्मियों ने सरकार एवं समाज कल्याण विभाग से मांग की है कि—
-वर्षों से लंबित 1465 स्थायी पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाए।
-संविदा कर्मियों को समय पर मानदेय का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
-लंबे समय से एक ही मानदेय पर कार्य कर रहे कर्मियों के मानदेय में नियमित एवं उचित वृद्धि की जाए।
-बुनियाद केंद्रों के कर्मियों की सेवा संबंधी समस्याओं का स्थायी समाधान किया जाए।
-वृद्ध, विधवा एवं दिव्यांग लाभार्थियों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए केंद्रों में आवश्यक मानव संसाधन की कमी दूर की जाए।
बुनियाद केंद्र समाज के उन वर्गों के लिए महत्वपूर्ण सहारा हैं, जिन्हें सामाजिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं की सबसे अधिक आवश्यकता है। ऐसे में इन केंद्रों को सुचारू रूप से संचालित करने वाले कर्मियों की समस्याओं का समाधान भी प्राथमिकता के आधार पर किया जाना आवश्यक है।
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