उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान से मातृ-शिशु मृत्यु दर में आएगी कमी
-सीएचसी सुरसंड में एएनएम के लिए एक दिवसीय क्षमतावर्द्धन कार्यशाला आयोजित, 25 स्वास्थ्यकर्मियों ने लिया प्रशिक्षण
-एचआरपी की पहचान, समय पर रेफरल, नियमित एएनसी जांच और फॉलो-अप पर दिया गया विशेष प्रशिक्षण
सीतामढ़ी। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर (एमएमआर) में कमी लाने तथा प्रसव संबंधी जटिलताओं की समय रहते पहचान और प्रभावी प्रबंधन के उद्देश्य से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) सुरसंड में एएनएम के लिए एक दिवसीय उन्मुखीकरण एवं क्षमतावर्द्धन कार्यशाला का आयोजन किया गया। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. लालू कुमार की अध्यक्षता में आयोजित इस प्रशिक्षण में प्रखंड के विभिन्न स्वास्थ्य उपकेंद्रों से आईं 25 आउटरीच एएनएम ने भाग लिया।
कार्यशाला में पिरामल फाउंडेशन के प्रोग्राम लीड दुर्गा प्रसाद सिंह एवं गांधी फेलो रोशन कुमार गिरि ने उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था (एचआरपी) की पहचान, समय पर प्रबंधन एवं रेफरल की प्रक्रिया पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया। एएनएम को गंभीर एनीमिया, उच्च रक्तचाप, गर्भावधि मधुमेह, कम या अधिक आयु में गर्भधारण तथा पूर्व में जटिल प्रसव जैसी स्थितियों की पहचान कर समय पर उच्च स्वास्थ्य केंद्रों में रेफर करने और नियमित फॉलो-अप सुनिश्चित करने के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही गृह भ्रमण के दौरान गर्भवती महिलाओं एवं उनके परिजनों को पोषण, प्रसव पूर्व जांच, संस्थागत प्रसव और आपातकालीन तैयारियों के प्रति जागरूक करने पर भी विशेष जोर दिया गया।
इस अवसर पर डॉ. लालू कुमार ने कहा कि सामुदायिक स्तर पर कार्यरत एएनएम मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। यदि गांव स्तर पर ही उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय रहते पहचान हो जाए, तो अधिकांश जटिलताओं से बचाव संभव है। वहीं, प्रखंड अस्पताल प्रबंधक मोहम्मद सदरुद्दीन और प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक कृष्णनंदन कुमार ने सभी एएनएम को नियमित एएनसी जांच सुनिश्चित करने तथा एचआरपी पोर्टल पर समय पर डेटा प्रविष्टि करने के निर्देश दिए।
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