33 फाइलेरिया मरीजों को एमएमडीपी किट वितरित, देखभाल व बचाव की दी गई जानकारी
-एक दिवसीय कार्यशाला में हाथीपांव रोगियों को स्व-देखभाल एवं संक्रमण से बचाव का दिया गया प्रशिक्षण
-सर्वजन दवा सेवन अभियान को सफल बनाने में जनभागीदारी बढ़ाने की अपील
-दिव्यांगता प्रमाणपत्र एवं सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए किया गया जागरूक
शिवहर। फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के तहत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, पिपराही में मंगलवार को फाइलेरिया (हाथीपांव) से पीड़ित 33 मरीजों के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान सभी मरीजों को रुग्णता प्रबंधन एवं विकलांगता निवारण (एमएमडीपी) किट वितरित की गई, ताकि वे घर पर नियमित रूप से पैरों की सफाई, घावों की देखभाल एवं संक्रमण से बचाव कर सकें।
कार्यक्रम की अध्यक्षता चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रामाशंकर प्रसाद ने की। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया एक गंभीर एवं लाइलाज बीमारी है, लेकिन समय पर रोकथाम और नियमित देखभाल से इसके दुष्प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने लोगों से सरकार द्वारा संचालित वार्षिक सर्वजन दवा सेवन अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने तथा जनभागीदारी के माध्यम से पिपराही को फाइलेरिया मुक्त बनाने का आह्वान किया। इस अवसर पर बीएचएम दीपनारायण कुमार एवं पिरामल स्वास्थ्य के नवीन मिश्रा भी उपस्थित रहे।
कार्यशाला में मरीजों को हाथीपांव की नियमित सफाई, सूजन कम करने के उपाय तथा संक्रमण से बचाव के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। बीसीएम शिवजी प्रसाद ने एमएमडीपी किट में उपलब्ध साबुन, तौलिया, एंटीसेप्टिक, चप्पल एवं अन्य आवश्यक सामग्री के सही उपयोग का व्यावहारिक प्रदर्शन कर मरीजों को स्व-देखभाल की विधि समझाई।
कार्यक्रम पदाधिकारी नवीन कुमार ने कहा कि फाइलेरिया रोकथाम योग्य बीमारी है और मरीजों को नियमित उपचार एवं साफ-सफाई अपनाने की आवश्यकता है। वहीं पिरामल स्वास्थ्य के कार्यक्रम पदाधिकारी (संचारी रोग) नवीन मिश्रा ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य मरीजों को आत्मनिर्भर बनाना और बीमारी के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने मरीजों को दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनवाने एवं ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया की जानकारी भी दी, ताकि पात्र मरीजों को सरकारी योजनाओं एवं दिव्यांगता संबंधी सुविधाओं का लाभ मिल सके।
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