किसी भी प्रकार का खबर व विज्ञापन के लिए सम्पर्क करे 6201984873

  • Breaking News

    एईएस/जेई की रोकथाम, इलाज एवं जागरूकता के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये जिलाधिकारी ने की बैठक

    मुजफ्फरपुर। जिले में एईएस/जेई की रोकथाम एवं प्रभावी नियंत्रण को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में  है।  इस बाबत जिलाधिकारी श्री कुमार गौरव ने सभी संबंधित विभाग के अधिकारियों के साथ समाहरणालय मे बैठक की तथा आवश्यक निर्देश दिया।

    बैठक में सभी अधिकारियों को अलर्ट एवं केयरफुल रहने के साथ-साथ मिशन मोड में सक्रिय एवं तत्पर होकर कार्य करने का सख्त निर्देश दिया गया। उन्होंने कहा कि यह केवल स्वास्थ्य विभाग का दायित्व नहीं है, बल्कि सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ काम करना होगा ताकि एक भी बच्चा इस बीमारी की चपेट में न आए।

    वाहन टैगिंग और एम्बुलेंस व्यवस्था सुदृढ़:

    मरीजों को त्वरित इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिले के सभी 373 पंचायतों में कुल 2575 वाहनों की प्रखंडवार/ पंचायतवार टैगिंग कर दी गई है ताकि लोगों को स्थानीय स्तर पर ही सरकारी खर्चे से निकटतम स्वास्थ्य केंद्र तक मरीज को त्वरित एवं सहज रूप में पहुंचाने की निशुल्क सुविधा उपलब्ध हो सके।   इन वाहनों का भुगतान सरकारी दर के अनुसार दूरी के हिसाब से ₹400 से ₹1000 तक किया जाएगा।

    इसके अलावा जिले में वर्तमान में कुल 67 एम्बुलेंस कार्यरत हैं, जिन्हें पूरी तरह सक्रिय रखा गया है। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि प्रखंडवार और पंचायतवार टैग किए गए वाहनों की सूची संबंधित क्षेत्रों में उपलब्ध कराई जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल संपर्क कर मरीजों को बिना  देर किये निकटतम अस्पताल पहुंचाया जा सके।

    बच्चों पर विशेष निगरानी, घर-घर सर्वे:

    एईएस का सबसे अधिक प्रभाव बच्चों पर पड़ता है, इसे ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक स्तर पर 0 से 15 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों पर विशेष निगरानी की व्यवस्था की है। घर-घर सर्वे के माध्यम से पूरे जिले में इस आयु वर्ग के कुल 11,32,513 बच्चों का डेटा तैयार किया गया है। इनमें से 3051 बच्चों को चिन्हित कर विशेष निगरानी की जा  रही है।

     जिलाधिकारी ने सिविल सर्जन को निर्देश दिया है कि जिले से लेकर प्रखंड स्तर तक सभी स्वास्थ्य कर्मियों एवं संबंधित अधिकारियों का प्रशिक्षण एवं क्षमता वर्धन सुनिश्चित कर अलर्ट रखें।   जिले में अब तक 25,368 अधिकारियों एवं कर्मियों का प्रशिक्षण कराया जा चुका है। साथ ही सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे पंचायत स्तर पर भी कर्मियों का प्रशिक्षण सुनिश्चित करें और नियमित रूप से इसकी मॉनिटरिंग करें।

    35 मामले रिपोर्टेंड, मुजफ्फरपुर के 20 मामले, सभी मरीज स्वस्थ होकर घर लौटे:

    बैठक में एईएस के मामलों की समीक्षा के दौरान बताया गया कि अब तक कुल 35 मामले सामने आए हैं, जिनमें से 20 मामले मुजफ्फरपुर जिले के हैं। अन्य मामलों में पूर्वी चंपारण के 4, सीतामढ़ी के दो, शिवहर के पांच, पश्चिम चंपारण के एक, सारण के एक, गोपालगंज के एक और समस्तीपुर के एक  मामला शामिल है। राहत की बात यह है कि सभी मरीजों का समुचित इलाज किया गया और उन्हें स्वस्थ होने के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया है।

    उन्होंने  किसी भी नये मामले की सूचना तुरंत देने और मरीज को बिना देरी के उचित उपचार उपलब्ध कराने को कहा।

    कंट्रोल रूम और त्वरित सहायता की सुदृढ़ व्यवस्था:

    मरीजों और उनके परिजनों को त्वरित सहायता प्रदान करने के लिए जिला से लेकर प्रखंड स्तर तक नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं। सदर अस्पताल, एसकेएमसीएच और आपातकालीन संचालन केंद्र में कंट्रोल रूम 24 घंटे क्रियाशील हैं। इसके साथ ही प्रत्येक प्रखंड में भी कंट्रोल रूम गठित किए गए हैं, ताकि जरूरतमंद लोगों को तुरंत सहायता मिल सके।

    सदर अस्पताल का नियंत्रण कक्ष

    0621-2266055

    0621-2266056

    एसकेएमसीएच 

    0621-2233868

    आपातकालीन संचालन केंद्र का नियंत्रण कक्ष

    0621-2212007

    जागरूकता अभियान अनवरत जारी:

    जिलाधिकारी ने कहा कि एईएस से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय जागरूकता है। संध्या चौपाल, प्रभात फेरी, घर-घर भ्रमण जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। अब तक 1 लाख हैंडबिल और 200 स्टीकर का वितरण किया जा चुका है।

    सप्ताहवार कार्यक्रम के तहत सोमवार और गुरुवार को प्रभात फेरी, मंगलवार को महादलित टोले में गृह भ्रमण, बुधवार और शुक्रवार को वीएचएसएनडी के दौरान जागरूकता कार्यक्रम, तथा शनिवार को संध्या चौपाल आयोजित की जा रही है। आंगनबाड़ी सेविका, सहायिका, जीविका दीदी एवं स्कूली बच्चों के माध्यम से भी जन-जागरूकता अभियान को गति दी जा रही है।बैठक मे अवगत कराया गया कि सभी 373 पंचायतों में अधिकारियों की तैनाती कर हर शनिवार को संध्या चौपाल आयोजित किया जा रहा है।  जन-जागरूकता एक प्रभावी माध्यम है, जिसके जरिए गांव-गांव तक सही जानकारी पहुंचाई जा सकती है। 

    एहतियाती उपायों एवं सावधानी के बारे मे किया जा रहा जागरूक:

    एईएस से बचाव के लिए सतर्कता और जागरूकता बेहद जरूरी है।  अभिभावकों से आग्रह किया गया है कि बच्चों को खाली पेट न सुलाएं, उन्हें पर्याप्त पोषण दें और किसी भी प्रकार के लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।

    No comments

    Post Top Ad

    ad728

    Post Bottom Ad

    ad728