फेरिक कॉर्बोक्सीमाल्टोज की खुराक से गंभीर एनीमिया पर रोकथाम की कवायद
-खुराक को लेकर सामुदायिक जागरूकता पर बल, क्षमतावर्धन से बदल रही सेहत
-रिसर्च में एनीमिया दूर करने एफसीएम खुराक के अधिक प्रभावी होने की हुई पुष्टि
गया: जिला में गंभीर एनीमिया से ग्रसित गर्भवतियों को लेकर स्वास्थ्य विभाग सजग है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा फेरिक कॉर्बोक्सीमाल्टोज की खुराक देने की कवायद को गति दी जा रही है। गर्भवतियों को इस प्रभावी खुराक की जानकारी आशाकर्मियों द्वारा दी जा रही है। एफसीएम की एक खुराक आयरन सुक्रोज की चार खुराक की तुलना में अधिक प्रभावी है। सदर अस्पताल सहित सभी सामुदायिक तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात चिकित्सक तथा एएनएम का फेरिक कॉर्बोक्सीमाल्टोज की खुराक देने को लेकर क्षमतावर्धन किये जाने के बाद खुराक लेने वाली गर्भवतियों की संख्या भी धीरे—धीरे बढ़ रही है।
तकरीबन 300 गर्भवतियों को दिया गया डोज:
जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीएम नीलेश कुमार ने बताया कि जिला में तकरीबन गंभीर रोग से ग्रसित 300 गर्भवतियों को एफसीएम खुराक दिये गये हैं। फेरिक कॉर्बोक्सीमाल्टोज का सबसे अधिक डोज प्रभाावती अस्पताल में आने वाली 90 एनीमिया पीड़ित गर्भवतियों को दी गयी है। जबकि जेपीएन अस्पताल में 30 गर्भवतियों को दी गयी है। वहीं मोहनपुर प्रखंड में सबसे अधिक 30 गर्भवतियों को फेरिक कॉर्बेाक्सीमाल्टोज खुराक दी गयी है। दूरस्थ क्षेत्र में रहने वाली गर्भवतियों जो त्रविभिन्न कारणों से स्वास्थ्य केंद्र नहीं पहुंच पाती हैं या जिन्हें आवागमन की कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है, उनके लिए एफसीएम का सिर्फ एक डोज काफी मायने रख रहा है। स्वास्थ्यकर्मियों के क्षमतावर्धन और आशा की मदद से समुदाय में इस खुराक के प्रति सकारात्मक संदेश भेजा गया है।
दूरस्थ क्षेत्र से आवागमन की मजबूरी हुई दूर:
नीलम कुमारी और किरण कुमारी बाराचट्टी प्रखंड के दूरस्थ क्षेत्र हाहेसाढी तथा पतलूका गांव की निवासी हैं। गर्भधारण के समय दोनों काफी कमजोर थी। आशाकर्मियों की मदद से जब दोनों गर्भवतियों की रक्त जांच करायी गयी तो एएनएम ने बताया कि खून की काफी कमी है। घर से स्वास्थ्य केंद्र की लंबी दूरी और आवागमन की कठिनाईयों के कारण इन गर्भवतियों ने स्वास्थ्य केंद्र जाना जरूरी नहीं समझा। लेकिन आशा मीना देवी ने उनके स्वास्थ्यस के प्रति सर्तकता बरतते हुए इलाज को जरूरी समझा और स्वास्थ्य केंद्र ले जाने पहुंची। आशा मीना ने गर्भवतियों को खून की कमी दूर करने वाली एफसीएम खुराक की जानकारी दी। आशाकर्मी मीना बताती हैं कि दोनों महिलाओं ने आयरन सुक्रोज इंजेक्शन के बारे में सुन रखा था कि इसके लिए बार बार महिलाओं को स्वास्थ्य केंद्र जाना पड़ता है इसलिए उन्होने वहां जाने मे रुचि नहीं दिखाई। लेकिन आशा ने जब फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज के सिर्फ एक डोज से गंभीर एनीमिया के इलाज की बात समझायी तो दोनों गर्भवतियों ने उनकी बात मान खुराक ली।
सकारात्मक संदेश देने की हो रही कोशिश:
बाराचट्टी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात चिकित्सक डॉ दीप ज्योंति बताती हैं कि एफसीएम डोज देने के क्षमतावर्धन के बाद समुदाय में सकारात्मक संदेश भेजने की कोशिश की जा रही है कि गंभीर एनीमिया को दूर करने इसका सिर्फ एक डोज ही महत्वपूर्ण है। इससे कई गर्भवती बार बार स्वास्थ्य केंद्र के आने जाने की परेशानी से भी बच जा रही हैं।
रिसर्च में एफसीएम अधिक कारगर साबित:
राज्य के दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में 110 महिलाओं में एफसीएम और आयरन सुक्रोज की तुलनात्मक अध्ययन ए कॉम्पेरेटिव स्टडी आॅफ इंजेक्शन फेरिक कॉर्बोक्सीमाल्टोज एंड आयर सुक्रोज इन एनीमिया कॉमप्लीकेटिंग प्रेगनेंसी में एफसीएम की प्रभावशीलता अधिक देखी गयी। विभिन्न शोध में यह पाया गया कि एफसीएम लेने वाली गर्भवतियों में 12 सप्ताह बाद हीमोग्लोबिन की वृद्धि आयरन सुक्रोज की तुलना में अधिक थी। साथ ही अस्पताल जाने की आवश्यकता बहुत कम पड़ी और कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं मिला।
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