मस्तिष्क ज्वर नियंत्रण में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका होगी निर्णायक
-सीतामढ़ी में सीडीपीओ एवं महिला पर्यवेक्षिकाओं के लिए एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित
-जन-जागरूकता, पोषण और समय पर उपचार पर दिया गया विशेष जोर
-हर आंगनबाड़ी केंद्र पर उपलब्ध हैं पैरासिटामोल और ओआरएस
सीतामढ़ी। समाहरणालय स्थित ‘परिचर्चा भवन’ में जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) एवं मस्तिष्क ज्वर की रोकथाम, नियंत्रण एवं जन-जागरूकता को लेकर जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यालय के तत्वावधान में सभी बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों (सीडीपीओ) एवं महिला पर्यवेक्षिकाओं के लिए एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सिविल सर्जन डॉ. अखिलेश कुमार ने की।
कार्यक्रम का शुभारंभ सिविल सर्जन डॉ. अखिलेश कुमार, जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. रवीन्द्र कुमार यादव तथा समेकित बाल विकास परियोजना की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी श्रीमती निशिकांत द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने कहा कि मस्तिष्क ज्वर की रोकथाम एवं बचाव में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी सीडीपीओ एवं महिला पर्यवेक्षिकाओं को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाएं तथा बीमारी के शुरुआती लक्षणों की पहचान और प्राथमिक उपचार में सहयोग सुनिश्चित करें।
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. रवीन्द्र कुमार यादव ने दृश्य-श्रव्य माध्यम से मस्तिष्क ज्वर के कारण, लक्षण, बचाव एवं उपचार संबंधी विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर पैरासिटामोल एवं ओआरएस उपलब्ध करा दिए गए हैं। आवश्यकता इस बात की है कि इनका सही एवं समय पर उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
सिविल सर्जन डॉ. अखिलेश कुमार ने सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से मस्तिष्क ज्वर नियंत्रण अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की। उन्होंने कुपोषित बच्चों की विशेष पहचान कर उन्हें सदर अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) भेजने पर बल दिया।
डॉ. यादव ने कहा कि बच्चों को भरपेट एवं प्रोटीन युक्त भोजन उपलब्ध कराया जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी बच्चा रात में भूखा न सोए। उन्होंने जिले में संचालित प्रचार-प्रसार वाहन एवं संध्या चौपाल कार्यक्रमों में अधिक से अधिक जनसहभागिता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी महिला पर्यवेक्षिकाओं को सौंपी।
कार्यशाला में सभी बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, महिला पर्यवेक्षिकाएं, बीसीओ, वीबीडीएस, एफएलए, डीईओ तथा पीरामल फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
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