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    एआई चैटबॉट ‘खुशी’ बनेगी टीबी मरीजों की डिजिटल हमसफ़र, 24 घंटे करेगी मदद

    •मोबाइल में मिलेगी डॉक्टर, सलाहकार और दोस्त की सुविधा

    •लक्षण, जांच, इलाज, पोषण और दवा से जुड़े हर सवाल का मिलेगा तुरंत जवाब

    पटना- टीबी जैसी गंभीर बीमारी के खिलाफ चल रही देश की लड़ाई में अब तकनीक ने भी मोर्चा संभाल लिया है। मरीजों को सही समय पर सही जानकारी और निरंतर मार्गदर्शन देने के लिए "टीबी मुक्त भारत" मोबाइल ऐप में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित चैटबॉट ‘खुशी’ को शामिल किया गया है। यह चैटबॉट न केवल टीबी मरीजों के सवालों का जवाब देगी, बल्कि उपचार के दौरान उनका हौसला बढ़ाने और इलाज पूरा कराने में भी अहम भूमिका निभाएगी।

    टीबी से जुड़ी हर जानकारी अब आपकी उंगलियों पर

    अक्सर टीबी मरीजों और उनके परिवार के लोगों के मन में कई सवाल उठते हैं—लगातार खांसी क्या टीबी का संकेत है? जांच कहां होगी? दवा कितने दिनों तक खानी होगी? मरीज को क्या खाना चाहिए? बीमारी दूसरों में फैल सकती है या नहीं?

    अब इन सभी सवालों के जवाब पाने के लिए अस्पतालों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी। ‘खुशी’ चैटबॉट कुछ ही सेकंड में सरल भाषा में सटीक और प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराएगी। इससे मरीजों को समय पर इलाज शुरू करने और बीमारी को समझने में मदद मिलेगी।

    सिर्फ चैटबॉट नहीं, मरीजों की ‘डिजिटल सहेली’

    टीबी का इलाज लंबा चलता है और कई बार मरीज बीच में दवा छोड़ देते हैं, जिससे बीमारी और गंभीर हो सकती है। ‘खुशी’ मरीजों को समय पर दवा लेने, चिकित्सकीय सलाह का पालन करने और इलाज पूरा करने के लिए लगातार प्रेरित करेगी। यही वजह है कि स्वास्थ्य विभाग इसे मरीजों की डिजिटल सहेली और ई-निक्षय मित्र के रूप में देख रहा है।

    12 भाषाओं में करेगी संवाद, आवाज में भी देगी जवाब

    ‘खुशी’ की सबसे बड़ी विशेषता इसकी बहुभाषी क्षमता है। यह हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, बंगाली समेत 12 भाषाओं में उपलब्ध है। इतना ही नहीं, यह टेक्स्ट के साथ-साथ आवाज के माध्यम से भी लोगों से संवाद कर सकती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों, बुजुर्गों और कम पढ़े-लिखे लोगों को भी आसानी से लाभ मिलेगा।

    टीबी मुक्त भारत की राह होगी आसान

    पीएमसीएच के कार्डियोलॉजी विभाग के चेस्ट स्पेशलिस्ट डॉ. बी.के.चौधरी ने कहा कि टीबी के खिलाफ लड़ाई में जानकारी और जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। ‘खुशी’ मरीजों, उनके परिजनों और आम लोगों को सही जानकारी देकर इस अभियान को नई गति देगी। यह तकनीक स्वास्थ्य सेवाओं और आम जनता के बीच की दूरी को कम करेगी तथा लाखों लोगों तक विश्वसनीय स्वास्थ्य जानकारी पहुंचाएगी।

    अब टीबी मरीज अकेले नहीं हैं...

    जब भी कोई मरीज टीबी को लेकर चिंतित होगा, जब भी उसे दवा, जांच या इलाज से जुड़ा कोई सवाल परेशान करेगा, तब उसके मोबाइल में मौजूद ‘खुशी’ हर पल मदद के लिए तैयार रहेगी।

    टीबी के खिलाफ इस जंग में अब मरीजों के साथ खड़ी है तकनीक की नई ताकत—‘खुशी’, जो जानकारी भी देगी, हौसला भी बढ़ाएगी और स्वस्थ जीवन की राह भी दिखाएगी।

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