सर्वाइकल कैंसर से बचाव को लेकर एचपीवी टीकाकरण अभियान तेज, प्रखंडवार प्रगति की डीएम ने की समीक्षा
मुजफ्फरपुर। जिले में सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए चलाए जा रहे एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण अभियान को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। इसी क्रम में जिलाधिकारी श्री सुब्रत कुमार सेन की अध्यक्षता में समाहरणालय सभागार में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें स्वास्थ्य विभाग सहित संबंधित अधिकारियों के साथ प्रखंडवार प्रगति, उपलब्धि और कमियों की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में स्पष्ट निर्देश दिया गया कि टीकाकरण अभियान को मिशन मोड में चलाते हुए शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया जाए।
बैठक में बताया गया कि सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाला एक गंभीर रोग है, जो एचपीवी संक्रमण के कारण होता है। इससे बचाव के लिए एचपीवी टीकाकरण अत्यंत प्रभावी है। राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य में 14 वर्ष आयु वर्ग की किशोरियों को “गार्डासिल” वैक्सीन की एक खुराक दी जा रही है। मुजफ्फरपुर जिले में इस अभियान की शुरुआत 24 फरवरी 2026 से की गई है और इसे तीन माह के विशेष अभियान के रूप में संचालित किया जा रहा है।
प्रखंडवार सत्र और उपलब्धि की समीक्षा:
यू-विन पोर्टल के आंकड़ों के आधार पर की गई। 6 अप्रैल 2026 तक जिले में कुल 106 टीकाकरण सत्र निर्धारित किए गए थे, जिनमें से 80 सत्र आयोजित किए जा चुके हैं। इन सत्रों के माध्यम से 98 किशोरियों को एचपीवी टीका दिया गया है। प्रखंडवार स्थिति की समीक्षा में पाया गया कि मुसहरी , सकरा, कटरा और औराई जैसे प्रखंडों में अपेक्षाकृत बेहतर प्रगति हुई है, जबकि कई प्रखंडों में अभी भी सत्रों का आयोजन और टीकाकरण की गति धीमी है।
जिलाधिकारी ने विशेष रूप से बंदरा, बोचहा, गायघाट और मोतीपुर जैसे प्रखंडों में शून्य या बेहद कम उपलब्धि पर नाराजगी जताई और वहां के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को तत्काल सुधार लाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जहां सत्र आयोजित नहीं हो पा रहे हैं, वहां कारणों की पहचान कर शीघ्र समाधान किया जाए।
जिलाधिकारी ने दूसरी डोज में भी सुधार की जरूरत पर दिया जोर:
बैठक में एचपीवी वैक्सीन की दूसरी डोज (Cervavac) की प्रगति की भी समीक्षा की गई। आंकड़ों के अनुसार जिले में कुल 15,160 लाभार्थियों को दूसरी डोज दी जानी है, जिनमें से अब तक 4,323 को ही टीका दिया गया है, जो कुल लक्ष्य का मात्र 28.52 प्रतिशत है।
प्रखंडवार स्थिति में मीनापुर ने 87.22 प्रतिशत उपलब्धि के साथ बेहतर प्रदर्शन किया है, जबकि सकरा, सरैया और पारू जैसे प्रखंडों में यह प्रतिशत काफी कम है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि जिन प्रखंडों में टीकाकरण का प्रतिशत कम है, वहां विशेष अभियान चलाकर शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया जाए।
स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों की भूमिका अहम:
जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों के साथ समन्वय स्थापित कर अधिक से अधिक किशोरियों को टीकाकरण के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी सेविका, सहायिका, आशा कार्यकर्ता और जीविका दीदी के माध्यम से घर-घर संपर्क कर अभिभावकों को जागरूक किया जाए, ताकि टीकाकरण को लेकर किसी प्रकार की भ्रांति न रहे।
उन्होंने यह भी कहा कि टीकाकरण पूरी तरह सुरक्षित है और इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन सहित विशेषज्ञ संस्थाओं द्वारा मान्यता प्राप्त है। इसलिए अभिभावकों को निश्चिंत होकर अपनी बेटियों का टीकाकरण कराना चाहिए।
मॉनिटरिंग और जवाबदेही तय:
बैठक में जिलाधिकारी ने सभी प्रखंडों के चिकित्सा पदाधिकारियों को सख्त निर्देश दिया कि वे नियमित रूप से टीकाकरण सत्रों की मॉनिटरिंग करें और यू-विन पोर्टल पर शत-प्रतिशत डेटा अपलोड सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
साथ ही यह भी निर्देश दिया गया कि जिन स्वास्थ्य केंद्रों का प्रदर्शन कमजोर है, वहां विशेष टीम भेजकर स्थिति में सुधार लाया जाए। मॉनिटरिंग, मोबिलाइजेशन और सर्विलांस की जिम्मेदारी स्थानीय स्तर पर तय करते हुए नियमित रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने को कहा गया।
जागरूकता अभियान पर जोर:
जिलाधिकारी ने कहा कि एचपीवी टीकाकरण अभियान की सफलता के लिए जन-जागरूकता बेहद जरूरी है। इसके लिए विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचार-प्रसार बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। अभिभावकों को आमंत्रण पत्र, पंपलेट और अन्य माध्यमों से जानकारी दी जा रही है, ताकि वे अपनी बेटियों का समय पर टीकाकरण करवा सकें।
उन्होंने कहा कि यह टीका सर्वाइकल कैंसर से बचाव का एक प्रभावी उपाय है और इससे भविष्य में महिलाओं को गंभीर बीमारी से बचाया जा सकता है। इसलिए इस अभियान को जन-आंदोलन के रूप में चलाना आवश्यक है।
डीएम ने की अपील:
बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने जिलेवासियों से अपील करते हुए कहा कि वे इस अभियान को गंभीरता से लें और अपनी 14 वर्ष आयु वर्ग की बेटियों का टीकाकरण अवश्य कराएं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक टीका नहीं, बल्कि बेटियों के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य की गारंटी है।
उन्होंने सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ कार्य करने और तय समयसीमा के भीतर शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने का निर्देश दिया। साथ ही यह भी कहा कि प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है और हर स्तर पर निगरानी रखी जा रही है, ताकि जिले को सर्वाइकल कैंसर के खतरे से सुरक्षित बनाया जा सके।
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