स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा बैठक में डीएम सख्त: संस्थागत प्रसव, जांच सुविधा एवं मातृ स्वास्थ्य सुधार पर दिया जोर, टीबी मुक्त अभियान में जिला अव्वल
मुजफ्फरपुर। जिलाधिकारी श्री सुब्रत कुमार सेन की अध्यक्षता में समाहरणालय सभागार में स्वास्थ्य विभाग की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच, संस्थागत प्रसव, सिजेरियन ऑपरेशन , एनसीडी, ओपीडी, आईपीडी, टीकाकरण सहित विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं की प्रखंडवार स्थिति एवं प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग के सभी एजेंडा पर बिंदुवार समीक्षा करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया कि मरीजों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पूरी जवाबदेही एवं मानवीय संवेदना के साथ कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि सभी अस्पतालों में विभागीय दिशा-निर्देशों एवं मानकों के अनुरूप आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तथा निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप शत-प्रतिशत उपलब्धि सुनिश्चित की जाए।
संस्थागत प्रसव बढ़ाने पर विशेष जोर:
जिलाधिकारी ने सिविल सर्जन एवं डीपीएम को निर्देश दिया कि वे प्रखंडवार नियमित भ्रमण कर संस्थागत प्रसव की स्थिति का आकलन करें और उसमें सुधार लाने के लिए ठोस कदम उठाएं। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से ग्रामीण एवं गरीब वर्ग की महिलाओं को उनके नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में सुरक्षित प्रसव की सुविधा उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए, ताकि उन्हें दूरस्थ क्षेत्रों से जिला मुख्यालय जाने की आवश्यकता न पड़े।
उन्होंने औराई एवं मुसहरी प्रखंड के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को संस्थागत प्रसव की कम उपलब्धि पर स्पष्टीकरण करने का निर्देश दिया तथा स्थिति में शीघ्र सुधार लाने को कहा। साथ ही यह भी निर्देशित किया कि सभी प्रखंडों में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने हेतु जन-जागरूकता एवं स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
सिजेरियन ऑपरेशन की व्यवस्था सुदृढ़ करने के निर्देश:
गर्भवती महिलाओं के लिए सिजेरियन ऑपरेशन की उपलब्धता की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने सदर अस्पताल के साथ-साथ कुढ़नी एवं मीनापुर प्रखंड में सिजेरियन ऑपरेशन की सुरक्षित एवं सुदृढ़ व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि आपात स्थिति में गर्भवती महिलाओं को त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए।
औराई प्रखंड में मातृ मृत्यु दर को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए जिलाधिकारी ने वहां के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, बीएचएम एवं बीसीएम को शो काउज जारी करने का निर्देश दिया तथा मातृ मृत्यु दर में शीघ्र सुधार लाने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने को कहा।
शिकायतों पर सख्त रुख, कार्रवाई के निर्देश:
बैठक में मुसहरी एवं मीनापुर प्रखंड के बीसीएम के विरुद्ध लगातार मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित प्रखंडों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट प्राप्त करने का निर्देश दिया। साथ ही सिविल सर्जन को इन शिकायतों की समीक्षा कर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि संबंधित पदाधिकारियों के कार्य में अपेक्षित सुधार नहीं देखा जाता है, तो उनके विरुद्ध विधिसम्मत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाय।
जांच सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश:
जिलाधिकारी ने जिले के स्वास्थ्य केंद्रों पर ईसीजी, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड एवं पैथोलॉजी जांच की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने सिविल सर्जन को नियमित रूप से स्वास्थ्य केंद्रों का औचक निरीक्षण करने तथा वहां उपलब्ध सुविधाओं की समीक्षा कर आवश्यक सुधार सुनिश्चित करने को कहा।
उन्होंने कहा कि मरीजों को सभी आवश्यक जांच सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि उन्हें अनावश्यक रूप से निजी संस्थानों या दूरस्थ स्थानों पर जाने की आवश्यकता न पड़े।
टीबी मुक्त अभियान में मुजफ्फरपुर अव्वल:
समीक्षा के क्रम में यह जानकारी दी गई कि टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत मुजफ्फरपुर जिला पूरे बिहार में प्रथम स्थान पर रहा है। जिले की कुल 86 पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया है, जिनमें से 8 पंचायतों ने सिल्वर कोटि तथा 78 पंचायतों ने ब्रॉन्ज कोटि का स्तर प्राप्त किया है।
प्रखंडवार उपलब्धि में बोचहा में 3 पंचायत, बंदरा में 5 पंचायत, गायघाट में 6 पंचायत, सकरा में 8 पंचायत, मुसहरी में 1 पंचायत, कटरा में 7 पंचायत, कांटी में 5 पंचायत, मोतीपुर में 9 पंचायत, साहेबगंज में 8 पंचायत, सरैया में 12 पंचायत, मरवन में 8 पंचायत, कुढ़नी में 4 पंचायत, मीनापुर में 5 पंचायत तथा पारू में 5 पंचायत शामिल हैं।
सिल्वर कोटि प्राप्त करने वाली पंचायतों में बंदरा का टेपरी पंचायत, गायघाट के बाघाखाल एवं रामनगर पंचायत, कटरा का लखनपुर पंचायत, सरैया के अमैठा, गिंजस एवं खैरा पंचायत तथा मरवन का जियान खुर्द पंचायत शामिल हैं।
अधिकारियों को सम्मानित करने के निर्देश:
जिलाधिकारी ने टीबी मुक्त अभियान में बेहतर प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों एवं कर्मियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों से अन्य कर्मियों को भी बेहतर कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी।
वर्तमान में जिले में 100 दिवसीय टीबी मुक्त अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत शेष पंचायतों को भी टीबी मुक्त बनाने के लिए विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है।
समन्वित प्रयासों से बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लक्ष्य:
बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाएं। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि प्रत्येक व्यक्ति को गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हों, और इसके लिए सभी को पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करना होगा।
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