मुजफ्फरपुर में 'मॉप-अप' अभियान के जरिए अंतिम प्रहार जारी
मुजफ्फरपुर: क्या आप जानते हैं कि फाइलेरिया का एक कीटाणु आपके शरीर में सालों तक बिना किसी लक्षण के रह सकता है और जब यह बीमारी बाहर आती है, तो पैर हाथी के समान सूज जाते हैं जिसका कोई इलाज नहीं है? इसी खतरे से आपको और आपके परिवार को बचाने के लिए जिला स्वास्थ्य समिति मुजफ्फरपुर ने कमर कस ली है। जिले के बोचहाँ और मुशहरी प्रखंडों में मॉप-अप अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें अब उन घरों का दरवाजा खटखटा रही हैं, जो किसी कारणवश दवा खाने से छूट गए थे। इस महाभियान में विभाग की कड़ाई और सीएचओ के नेतृत्व में पीएसपी सदस्यों की ममतामयी समझावन रंग ला रही है।
भ्रम त्यागें, स्वास्थ्य चुनें: सीएचओ और पीएसपी सदस्यों ने बदली गांवों की तस्वीर
अक्सर लोग दवा खाने के बाद होने वाले मामूली सिरदर्द या जी मिचलाने से डरकर दवा छोड़ देते हैं, लेकिन बोचहाँ के बसौली और पटियासा गांवों में सीएचओ के मार्गदर्शन में पीएसपी सदस्यों ने इस डर को जीत में बदल दिया है। बसौली हिम्मत सिंह गाँव में पीएसपी सदस्य मेनका कुमारी ने परिवारों को बड़े ही सरल ढंग से समझाया कि दवा खाने के बाद होने वाली मामूली हलचल इस बात का संकेत है कि आपके शरीर के भीतर मौजूद फाइलेरिया के सूक्ष्म कीटाणु मर रहे हैं। उनके इस भरोसे पर उन 12 लोगों ने भी दवा खाई जो अब तक इससे भाग रहे थे। वहीं पटियासा में ममता कुमारी ने एक फाइलेरिया मरीज के साथ मिलकर लोगों को यह एहसास कराया कि "दवा की एक खुराक, अपंगता से बेहतर है।" यहाँ सरकारी दवा पर अविश्वास करने वाले परिवारों ने भी आगे बढ़कर दवा का सेवन किया।
मुशहरी में विभाग का सख्त संकल्प: "एक भी घर छूटा, तो सुरक्षा चक्र टूटा"
मुशहरी ब्लॉक में आयोजित आशा और आशा फैसिलिटेटर की उच्चस्तरीय बैठक में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने स्पष्ट कर दिया है कि मॉप-अप राउंड में लापरवाही की कोई जगह नहीं है। उन्होंने सख्त आदेश दिए हैं कि अभियान के दौरान एक भी घर या स्कूल सर्वे से बाहर नहीं रहना चाहिए। विभाग का लक्ष्य केवल दवा खिलाना नहीं, बल्कि एनबीएस के मरीजों को चिन्हित कर उन्हें 12 दिनों का विशेष उपचार देना भी है। इस कार्य की निगरानी बीएचएम और बीसीएम के द्वारा सीधे तौर पर की जा रही है, ताकि फील्ड में आने वाली किसी भी समस्या का तुरंत समाधान हो सके। पिरामल जैसी सहयोगी संस्थाएं भी इस मिशन में कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं।
अनुशासन और समर्पण: विभाग की पैनी नजर
जहाँ स्वास्थ्य विभाग की टीमें पिरामल के सहयोग से फाइलेरिया मुक्त मुजफ्फरपुर का सपना सच करने में जुटी हैं, वहीं कार्य में कोताही बरतने वालों पर गाज गिरना तय है। मुशहरी की बैठक से गायब रही अनिता देवी और उनकी टीम पर बीसीएम द्वारा जाँच बैठा दी गई है। स्वास्थ्य विभाग की यह सख्ती और सीएचओ-पीएसपी टीम का यह समर्पण केवल एक ही लक्ष्य के लिए है—कि आपके घर का कोई भी सदस्य भविष्य में हाथीपांव जैसी लाचारी का शिकार न बने।
जिला स्वास्थ्य समिति आप सभी से अपील करती है कि मॉप-अप अभियान के दौरान घर आए स्वास्थ्य कर्मियों का सहयोग करें और खाली पेट दवा न खाकर, भोजन के बाद उनके सामने ही दवा का सेवन करें। आपकी एक जागरूकता आपके परिवार को उम्रभर की विकलांगता से बचा सकती है।
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