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    सदर अस्पताल वैशाली में क्षय रोग उन्मूलन हेतु कार्यशाला: जाँच प्रणालियों में क्यूआर कोड तकनीक के प्रयोग पर बल

    - जाँच प्रणालियों के डिजिटलीकरण और पारदर्शिता हेतु क्यूआर कोड तकनीक का प्रशिक्षण दिया गया

    -​क्षय रोग उन्मूलन हेतु सक्रिय रोगी खोज अभियान और उपचार की चरणबद्ध समीक्षा की गई

    ​वैशाली। ​वैशाली जिले के सिविल सर्जन डॉ श्यामनंदन प्रसाद की अध्यक्षता में बुधवार को सदर अस्पताल के प्रशासनिक खंड स्थित क्षय रोग विभाग के सभागार में एक दिवसीय कार्यशाला सह मासिक समीक्षा बैठक संपन्न हुई। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाना तथा आधुनिक तकनीकों के माध्यम से बीमारियों की निगरानी को बेहतर करना रहा।

    प्रयोगशाला सेवाओं में क्यूआर कोड के एकीकरण का मुख्य उद्देश्य:

    ​इस कार्यशाला का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष प्रयोगशाला जाँच से संबंधित क्यूआर कोड का प्रशिक्षण रहा। इस तकनीक को लागू करने का प्राथमिक ध्येय जाँच प्रक्रिया का पूर्णतः डिजिटलीकरण करना है ताकि नमूनों के संकलन से लेकर उनकी रिपोर्ट आने तक की प्रक्रिया पारदर्शी और सटीक बनी रहे। प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि इस क्यूआर कोड प्रणाली के माध्यम से रोगियों के आंकड़ों का प्रबंधन सुगम हो जाएगा और मानवीय त्रुटियों की संभावना न्यूनतम रह जाएगी। इससे स्वास्थ्य विभाग के पास प्रत्येक जाँच का वास्तविक समय का विवरण उपलब्ध रहेगा, जो क्षय रोग जैसी गंभीर बीमारी के उन्मूलन हेतु अत्यंत आवश्यक कदम है।

    ​क्षय रोग उन्मूलन की रणनीति एवं कार्यों की समीक्षा:

    ​बैठक के दौरान जिले में क्षय रोग निवारण के लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु 'सक्रिय रोगी खोज' अभियान पर विशेष चर्चा की गई। सीडीओ वैशाली, डॉ. अजय लाल द्वारा विभाग के कार्यों की चरणबद्ध तरीके से समीक्षा की गई और उन्होंने राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम की टीम को भविष्य के लिए उचित दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जाँच से लेकर उपचार की पूरी श्रृंखला में तत्परता बरतना अनिवार्य है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने भी इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्र स्तर पर अधिक से अधिक संभावित रोगियों की पहचान की जाए और उनका समय पर उपचार सुनिश्चित किया जाए। जिले में अभी कुल 7978 टीबी मरीज इलाजरत हैं।

    ​विशिष्ट विशेषज्ञों एवं स्वास्थ्य पदाधिकारियों की सहभागिता:

    ​इस तकनीकी कार्यशाला और समीक्षा बैठक में जिले के स्वास्थ्य ढांचे से जुड़े कई वरिष्ठ पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में सीनियर डीपीएस राजीव कुमार ने भी अपने विचार साझा किए और कार्यों को प्रभावी ढंग से लागू करने पर बल दिया। इसके अतिरिक्त विश्व स्वास्थ्य संगठन के परामर्शदाता, पाथ संस्था के प्रतिनिधि और एचएलएफपीपीटी के एसपीएम  आकाश ने तकनीकी जानकारी साझा की। बैठक में जिला कार्यक्रम प्रबंधक, सहायक कार्यक्रम अधिकारी, चिकित्सक और क्षय रोग विभाग के सहायकों सहित जिले के सभी वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षक, वरिष्ठ प्रयोगशाला पर्यवेक्षक और प्रयोगशाला तकनीशियनों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। उपस्थित सभी कर्मियों को क्यूआर कोड से होने वाले लाभों के बारे में विस्तार से बताया गया ताकि वे इसे क्षेत्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू कर सकें।

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