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    10 फरवरी से जिले में चलेगा सर्वजन दवा सेवन अभियान,स्वस्थ लोगों से भी फाइलेरिया रोधी दवाएं खाने की अपील : जिलाधिकारी

    -60 लाख से अधिक लोगों को खिलाई जाएगी दवा

    -25 से 27 फरवरी तक सार्वजनिक स्थलों पर खिलाई जाएगी दवा

    मुजफ्फरपुर। जिले में फाइलेरिया उन्मूलन के लिए चलाए जाने वाले सर्वजन दवा सेवन अभियान के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार कर ली गयी है।  जिले में यह अभियान आगामी 10 फरवरी से शुरू होकर 27 फरवरी 2026 तक कुल 17 दिनों तक संचालित किया जाएगा। ये बातें जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने सोमवार को सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीएफएआर) और जिला स्वास्थ्य समिति के सहयोग से आयोजित मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला में कही। उन्होंने कहा कि  इस विशेष अभियान के तहत जिले की लगभग 60 लाख 700 की लक्षित आबादी को फाइलेरिया से बचाव की दवा खिलाई जाएगी। अभियान को सफल बनाने के लिए कुल 2409 टीमें गठित की गई हैं जिनमें 3571 आशा कार्यकर्ता और 1294 आंगनबाड़ी सेविकाएं एवं स्वयंसेवक शामिल हैं। इन टीमों की निगरानी के लिए 227 पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं।

    दो चरणों में खिलाई जाएगी दवा

    मीडिया कार्यशाला के दौरान सिविल सर्जन डॉ अजय कुमार ने बताया कि अभियान के दौरान दवा खिलाने की प्रक्रिया को दो चरणों में बांटा गया है। पहले चरण में 10 फरवरी से 24 फरवरी तक स्वास्थ्य टीमें घर-घर जाकर लोगों को दवा खिलाएंगी जबकि दूसरे चरण में 25 से 27 फरवरी तक स्कूल, कॉलेज, कार्यालय, फैक्ट्री, ईंट भट्ठा, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थानों पर बूथ लगाकर दवा खिलाई जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि कटरा प्रखंड को छोड़कर यह अभियान जिले के सभी प्रखंडों और शहरी क्षेत्रों में चलाया जाएगा।

    अभियान के तहत तीन प्रकार की दवाएं दी जाएंगी जिनमें अल्बेंडाजोल, डीईसी और आइवरमेक्टिन शामिल हैं। एल्बेंडाजोल की एक गोली 2 वर्ष से ऊपर के सभी व्यक्तियों को दी जाएगी। डीईसी की खुराक उम्र के अनुसार तय की गई है जिसमें 2 से 5 वर्ष के लिए एक गोली, 6 से 14 वर्ष के लिए दो गोली और 15 वर्ष से ऊपर के लोगों के लिए तीन गोलियां निर्धारित हैं। वहीं आइवरमेक्टिन की खुराक व्यक्ति की ऊंचाई के आधार पर एक से चार गोली तक दी जाएगी जिसके मापन के लिए टीमों को डोज पोल उपलब्ध कराए गए हैं।

     खाली पेट दवा नहीं खाने की अपील 

    जिला भीबीडीसी पदाधिकारी डॉ सुधीर कुमार ने बताया कि दवा को कभी भी खाली पेट नहीं लेना है। इसके साथ ही 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों और एक सप्ताह के भीतर प्रसव कराने वाली महिलाओं को यह दवा नहीं दी जाएगी। दवा लेने के बाद यदि किसी व्यक्ति को उल्टी, बुखार, सिरदर्द या शरीर में दर्द जैसे लक्षण महसूस होते हैं तो उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है,ये शुभ संकेत हैं। ये मामूली से दिखने वाले प्रतिकूल प्रभाव स्वतः ठीक हो जाते हैं। प्रतिकूल प्रभाव या आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र पर रैपिड रिस्पांस टीम का गठन किया गया है और सभी कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर को प्रशिक्षित किया गया है। शहरी क्षेत्र के लिए विशेष रैपिड रिस्पांस टीम सदर अस्पताल मुजफ्फरपुर में तैनात रहेगी।

    मरीजों की प्रेरणा से बढ़ेगी दवा की स्वीकार्यता

     जिले में अभियान को एक मानवीय चेहरा देने के लिए 'सीएचओ लीड पीएसपी को भी जोड़ा गया है। फाइलेरिया की पीड़ा झेल रही विनोद महतो जैसे जागरूक फाइलेरिया रोगी अब समुदाय में स्वयंसेवक की भूमिका निभा रहे हैं। कार्यशाला में यह बात उभर कर आई कि जब एक मरीज खुद अपनी आपबीती सुनाकर दवा खाने की सलाह देता है, तो आम जनमानस में दवा के प्रति हिचकिचाहट कम होती है। कार्यशाला के दौरान एएनएम और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का मानना है कि इन मरीजों की सक्रियता से अभियान को जमीनी स्तर पर बड़ी मजबूती मिलेगी। मौके पर उप विकास आयुक्त अनुपम श्रेष्ठ, सिविल सर्जन डॉ अजय कुमार, एसीएमओ डॉ ज्ञानेंदु शेखर,डब्ल्यूएचओ की रीजनल कोऑर्डिनेटर डॉ माधुरी देवराजू,जिला भीबीडीसी पदाधिकारी डॉ सुधीर कुमार,जिला कार्यक्रम प्रबंधक रेहान अशरफ,डीआईओ डॉ संजीव पांडे,सीडीओ डॉ सीके दास,एनसीडीओ डॉ नवीन कुमार, जिला सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी प्रमोद कुमार,पीरामल से पीएम रिचा सिंह, डीएल इफ्तिखार अहमद खान,सभी भीडीसीओ सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मी एवं सहयोगी संस्था के प्रतिनिधि मौजूद थे।

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