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    स्वयं हाथीपाँव की पीड़ित, अब दूसरों को बचाने के लिए बनीं 'स्वास्थ्य योद्धा'

    -महासुंदरी देवी का दृढ़ संकल्प: संग्रामपुर के जलहा को फाइलेरिया मुक्त बनाने की मुहिम

    मोतिहारी। जब किसी व्यक्ति का व्यक्तिगत संघर्ष समाज के कल्याण का मार्ग बन जाता है, तो वह एक नई क्रांति का सूत्रपात करता है। पूर्वी चंपारण जिले के संग्रामपुर प्रखंड की महासुंदरी देवी (50वर्ष) आज इसी अटूट साहस का प्रतीक बन गई हैं। विगत 10 वर्षों से हाथीपाँव (फाइलेरिया) जैसी कष्टदायक व्याधि का दंश झेलने के बावजूद, उन्होंने अब "जलहा" क्षेत्र को इस बीमारी से पूरी तरह मुक्त करने का बीड़ा उठा लिया है।

    जन-जन तक पहुँचा रही हैं संदेश:

    मंगलापुर बरियरिया टोला (वार्ड संख्या 10) की आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-135 में सहायिका के रूप में कार्यरत महासुंदरी देवी 10 फरवरी से आरंभ होने वाले 'सर्वजन दवा सेवन' अभियान को सफल बनाने हेतु निरंतर प्रयासरत हैं। वे आंगनबाड़ी केंद्रों से लेकर ग्रामीणों की देहरी तक दस्तक दे रही हैं और लोगों को फाइलेरिया रोधी औषधि के सेवन हेतु प्रोत्साहित कर रही हैं।

    महासुंदरी देवी का कहना है, "16 वर्ष पूर्व मुझे इस रोग और इससे बचाव के उपायों का बोध नहीं था। यदि उस समय मैंने औषधि का सेवन किया होता, तो आज मेरी यह स्थिति न होती। अब मेरा उत्तरदायित्व है कि जो पीड़ा मैंने भोगी है, वह कोई और न भोगे।"

    स्वास्थ्य रक्षक की भूमिका:

    आयुष्मान आरोग्य मंदिर, जलहा में वे अब 'रोगी हितधारक मंच' (सीएचओ लीड पीएसपी) से जुड़कर एक सजग स्वास्थ्य प्रहरी की भाँति कार्य कर रही हैं। वे न केवल लोगों को गंदगी में पनपने वाले मच्छरों के खतरों के प्रति सचेत कर रही हैं, बल्कि औषधि के साथ-साथ नियमित व्यायाम के लाभ भी समझा रही हैं।

    दवा के प्रभाव से न डरें: स्वास्थ्य विभाग

    जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. शरत चंद्र शर्मा ने सूचित किया कि जिले में 6 हजार से अधिक हाथीपाँव और अंडवृद्धि (हाइड्रोसील) के रोगी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि औषधि सेवन के उपरांत यदि सामान्य चक्कर, ज्वर या जी मिचलाने जैसे लक्षण प्रकट हों, तो भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। "ये लक्षण इस बात का प्रमाण हैं कि शरीर में फाइलेरिया के सूक्ष्म परजीवी विद्यमान हैं और औषधि उन पर प्रभावी प्रहार कर रही है। यह प्रभाव अल्पकालिक होता है।"

    व्यापक जन-जागरूकता अभियान:

    प्रशासन ने इस अभियान की सफलता हेतु स्वास्थ्य केंद्रों, जन-प्रतिनिधियों, मुखिया, राशन विक्रेताओं और जीविका दीदियों के साथ मिलकर समितियों का गठन किया है। हाल ही में संपन्न हुए 'रात्रि रक्त सर्वेक्षण' में नए रोगियों की पुष्टि होने के उपरांत विभाग अब शत-प्रतिशत औषधि सेवन सुनिश्चित करने पर बल दे रहा है।

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