वैशाली की 'उम्मीदों वाली उड़ान': 154 मासूमों के दिलों को मिली नई धड़कन, बिहार में जिला बना मिसाल
-94 वें बैच के तहत हुई रवानगी
वैशाली। "जब डॉक्टर ने कहा कि बच्चे के दिल में छेद है, तो ऐसा लगा जैसे हमारी दुनिया ही थम गई। गरीबी के बीच इतने बड़े इलाज का खर्च सोचना भी नामुमकिन था, लेकिन आज सरकार और वैशाली की स्वास्थ्य टीम ने हमारे बच्चे को मौत के मुंह से निकालकर हवाई जहाज तक पहुंचा दिया है। हमें यकीन है कि अब वह बिल्कुल ठीक होकर लौटेगा।" यह कहना है उस पिता का, जिसकी आँखों में आज आँसू तो थे, पर वे डर के नहीं बल्कि उम्मीद और सुकून के थे।
यह भावुक दृश्य बुधवार को जिला स्वास्थ्य समिति, वैशाली में देखने को मिला, जहाँ मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के 94वें बैच के तहत एक और मासूम को नई जिंदगी की तलाश में अहमदाबाद रवाना किया गया। डॉ. शाइस्ता डीईआईसी प्रबंधक-सह-समन्वयक, आरबीएसके के नेतृत्व में वैशाली की टीम ने इस बच्चे को अपनी दुआओं और शुभकामनाओं के साथ विदा किया। यह सिर्फ एक बच्चे की रवानगी नहीं थी, बल्कि वैशाली के उस अटूट संकल्प की कहानी थी जिसने अब तक 154 परिवारों के बुझते चिरागों को फिर से रोशन किया है।
आज वैशाली जिला पूरे बिहार में इस योजना के सफल संचालन में तीसरे स्थान पर गर्व से खड़ा है। 154 सफल सर्जरी का यह आंकड़ा इस बात का गवाह है कि अगर प्रशासन और स्वास्थ्यकर्मी ठान लें, तो संसाधनों की कमी कभी किसी की जान की दुश्मन नहीं बन सकती। बच्चे को जिला मुख्यालय से दो 102 एम्बुलेंस के जरिए सम्मानपूर्वक राज्य स्वास्थ्य समिति, पटना भेजा गया, जहाँ से वह पटना एयरपोर्ट होते हुए श्री सत्य साईं हृदय अस्पताल, अहमदाबाद के लिए उड़ान भरेगा।
इस गौरवशाली अवसर पर डॉ. दीपक कुमार डीसीक्यूए, डॉ. कुमार सौरव मेडिकल आफिसर आरबीएसके, फार्मासिस्ट अभिषेक कुमार और डी.ई.ओ श्रवण कुमार जैसे समर्पित प्रोफेशनल्स ने बच्चे के बेहतर भविष्य की कामना की। डॉ. शाइस्ता ने इस दौरान गर्व से साझा किया कि उनकी टीम का हर सदस्य इस मिशन को एक इबादत की तरह निभा रहा है। राज्य में तीसरा स्थान हासिल करना सिर्फ एक रैंकिंग नहीं, बल्कि उन 154 मुस्कुराहटों की गूँज है जो वैशाली के घर-आँगन में फिर से लौट आई हैं। सात निश्चय-2 के तहत शुरू हुई यह योजना आज वैशाली के गरीबों के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रही है।
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