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    सीमा सुरक्षा बल के जवानों ने खाई फाइलेरिया की दवा

    सीमा सुरक्षा बल के जवानों ने खाई फाइलेरिया की दवा


    - करीब 200 जवानों को खिलाई गई दवा 

    - फाइलेरिया से बचने का एकमात्र उपाय डीईसी और एलवेन्डाजोल की गोली

    सीतामढ़ी। 6 अक्टूबर

    सीमा सुरक्षा बल के बटालियन 20 के जवानों को बुधवार को फाईलेरिया से बचाव के लिए जागरूक करने के साथ डीईसी तथा अल्वेन्डाजोल की गोली खिलाई गई। लगभग 200 जवानों को और उनके परिवार को "सर्वजन दवा सेवन "कार्यक्रम अन्तर्गत डीईसी एवं अल्बेन्डाजोल की  खुराक खिलाई गई। मौके पर फाइलेरिया के संबंध में कमांडेंट  प्रवीण कुमार ने अपने सम्बोधन मे कहा कि आज के कार्यक्रम से सभी जवानो को फाइलेरिया बीमारी के बारे मे अच्छी जानकारी मिली है और हमने तो दवा खा ली ,अब हम जवानो के माध्यम से सीमावर्ती क्षेत्रों मे भी सभी को दवा खाने को प्रेरित करेंगे ताकि अधिक से अधिक लोग दवा खाएँ और हाथीपाँव / हाईड्रोसील न होने दें।

    मालूम हो कि एमडीए का दूसरे चरण की शुरुआत हो चुकी है जिसमें लोगों को डीईसी तथा अल्वेन्डाजोल की गोली खिलाई जानी है। जिला भीबीडी नियंत्रण पदाधिकारी डॉ रवीन्द्र कुमार यादव ने बताया कि फाईलेरिया एक गंभीर बीमारी है जो मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलती है। संक्रमण और बीमारी के लक्षण प्रकट होने मे बहुत बार वर्षों लग जाते हैं। आप संक्रमित होते हुए भी लक्षण से मुक्त दीख सकते हैं और रोग फैलाने का माध्यम हो सकते हैं। ईसीलिए दवा सबको खानी चाहिए क्योंकि आप नहीं जानते कि आपके शरीर मे फाईलेरिया के सूक्ष्म परजीवी हैं अथवा नहीं । वहीं असिस्टेंट कमांडेंट अमित कुमार  ने कहा कि फाइलेरिया ऐसी बीमारी है जो मनुष्य को जीवन भर के लिये असमर्थ  बना देता है। इससे बचने का एक मात्र उपाय डीईसी और अल्वेन्डाजोल की  गोली खाना है। 

    डॉ रविन्द्र ने बताया कि एमडीए कार्यक्रम अन्तर्गत  सीतामढ़ी मे 36 लाख से अधिक  आबादी को आशा कार्यकर्ता द्वारा 14 दिनो मे घर घर जाकर फाईलेरिया से बचाव के लिए दवा खिलायी जायेगी। केवल 2 साल से छोटे बच्चे, गर्भवती महिला एवं गंभीर रूप से बीमार लोगों को दवा नहीं दी जायेगी। इसके लिए 1476 टीम बनाई गई है जिसका प्रखण्ड एवं जिला स्तर पर दैनिक पर्यवेक्षण किया जायेगा।

    प्रखण्ड स्तर पर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, प्रखण्ड विकास पदाधिकारी एवं सीडीपीओ की उपस्थिति मे संध्या कालीन समीक्षा की जायेगी।

    डॉ रविन्द्र ने कहा कि कार्ययोजना के अनुसार घर घर जाकर आशा कार्यकर्ता उम्र के अनुसार डीईसी एवं अल्बेन्डाजोल की एक खुराक अपने सामने खिलायेंगी और पंजी मे संधारित करेंगी। वे घरों पर मार्किंग भी करेंगी।

    10 टीम पर एक पर्यवेक्षक दिए गये हैं जो प्रतिदिन कम से कम 3 टीम का पर्यवेक्षण करेंगे और अपने अन्दर के सभी 10 टीम का प्रतिवेदन विहित प्रपत्र मे संकलित कर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर संध्या कालीन समीक्षा मे भाग लेंगी। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी समीक्षोपरांत विहित प्रपत्र मे जिला भीबीडी नियंत्रण कार्यालय को दैनिक प्रतिवेदन भेजेंगे । चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अनिल ने कहा कि हाथी पाँव से ग्रसित मरीजों ने भी लोगों से अपील की कि यदि हाथीपाँव के दर्द से बचना है तो बचाव के लिए दवा की खुराक जरूर ले क्योंकि बाद मे यह ठीक नहीं होता है।

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