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    कालाजार उन्मूलन को लेकर स्वास्थ्य कर्मियों की जिला स्तरीय बैठक का आयोजन

    -जिले में वर्ष 2026 में 15 भीएल, 08 पीकेडीएल के केस मिलें 

    मोतिहारी। कालाजार उन्मूलन को लेकर जिला स्वास्थ्य समिति स्थित आरोग्य भवन सभागार में सीएस दिलीप कुमार की अध्यक्षता में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, स्टॉफ नर्स, भीडीसीओ व अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की जिला स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। इस दौरान सीएस ने बताया की जिला कालाजार मुक्त घोषित हो चूका है, परन्तु 

    इसके प्रति बेहद सावधान रहने की जरूरत है। क्योंकि कभी भी पुराने केस वाले क्षेत्र में इसकी वृद्धि सम्भव है। उन्होंने बताया की जिले में वर्ष 2026 में 15 भीएल, 08 पीकेडीएल के केस मिलें है। जिनका ईलाज सरकारी अस्पताल में कराया गया। उन्होंने बताया की यह बालू मक्खी से होता है। इससे बचाव हेतु जागरूकता जरूरीहै। उन्होंने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, स्टॉफ नर्स, भीडीसीओ व अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। वहीं डब्लूएचओ की डीवीजीनल कोऑर्डिनेटर माधुरी देवराजू ने प्रोजेक्टऱ के माध्यम से प्रशिक्षण दिया। उन्होंने कहा कि कालाजार के मामलों को नियंत्रित करने के लिए केवल सामने आए मरीजों का इलाज पर्याप्त नहीं है, बल्कि संदिग्ध मरीजों की लगातार खोज जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन प्रखंडों में अब तक कोई मामला सामने नहीं आया है, वहां भी स्वास्थ्यकर्मियों को सक्रिय रहना होगा। विशेष रूप से पीकेडीएल के मरीजों की नियमित निगरानी करने पर जोर दिया गया। उन्होंने चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को बीमारी के लक्षण, जांच की प्रक्रिया, दवाओं की निर्धारित खुराक, उपचार के नियम और रिपोर्टिंग के बारे में जानकारी दी।

    दो सप्ताह से बुखार तो जांच जरूरी:

    कार्यशाला में डब्लूएचओ के मनोज तुमराडा ने बताया कि किसी व्यक्ति को लगातार दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक बुखार रहे तो उसे चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। संदिग्ध मरीजों की जांच निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार आरके-39 किट से करने की जानकारी दी गई। पहले कालाजार से पीड़ित रह चुके लोगों में दोबारा लक्षण दिखाई देने पर जरूरी पुष्टि जांच कराने के निर्देश भी दिए गए। इसके अलावा कालाजार मरीजों की एचआईवी जांच सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। वहीं डीआईओ डॉ शरत चन्द्र शर्मा ने कहा की त्वचा पर सफेद-लाल धब्बों को नजरअंदाज न करें। कालाजार से पीड़ित रह चुके लोगों को ऐसे बदलाव दिखने पर नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जांच करानी चाहिए। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से लंबे समय तक बुखार रहने या त्वचा पर असामान्य धब्बे और गांठें दिखाई देने पर सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में उपलब्ध निःशुल्क जांच सुविधा का लाभ उठाने की अपील की है।

    सिविल सर्जन डॉ. दिलीप कुमार ने कहा कि कालाजार उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करने में जमीनी स्तर पर काम करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम के माध्यम से पीकेडीएल मरीजों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने वर्ष 1990 के दशक में कालाजार की जांच और उपचार से जुड़े अपने अनुभव भी साझा किए और बताया कि उस दौर में सीमित संसाधनों के बीच मरीजों की जांच और इलाज किया जाता था, जबकि अब आधुनिक जांच सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को मरीजों की लंबित क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान जल्द कराने का भी निर्देश दिया।

    मरीजों को मिलती है 7100 रुपये की सहायता: 

    जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ.निकेश कुमार ने बताया कि कालाजार उन्मूलन के लिए कालाजार के मरीजों को श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में 7100 रुपये, पीकेडीएल में 4000 रूपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। मौके पर भीडीसीओ धर्मेंद्र कुमार, सत्यनारायण उरांव, रविंद्र कुमार, राकेश कु, पिरामल से पीयूष कुमार, पप्पू कुमार, सिफार से सिद्धांत कुमार व अन्य स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित थें।

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