नवजात शिशु सुरक्षा कार्यक्रम: स्वास्थ्यकर्मियों के दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण का हुआ आगाज
-16 प्रखंडों की नर्सों का हुआ प्री-टेस्ट, व्यावहारिक अभ्यास पर रहेगा विशेष जोर
-हाइपोथर्मिया से बचाव, संक्रमण नियंत्रण और नवजात पुनर्जीवन के सिखाए जा रहे गुर
-10 अक्टूबर तक चलेगा चरणबद्ध प्रशिक्षण, डॉक्टर और एएनएम भी होंगे शामिल
मुजफ्फरपुर। जिले में नवजात शिशुओं को जन्म के समय गुणवत्तापूर्ण एवं त्वरित स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा नवजात शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (एनएसएसके) के तहत दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण का सोमवार को विधिवत शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन जिला कार्यक्रम प्रबंधक सलीम जावेद द्वारा किया गया।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य प्रसव कक्ष में तैनात स्वास्थ्यकर्मियों के ज्ञान और तकनीकी कौशल को इतना सुदृढ़ करना है, जिससे नवजात मृत्यु दर में प्रभावी कमी लाई जा सके। इस अवसर पर डीएएम विनोद कुमार, डीएमएंडईओ राजेश झा, डीसीएम डॉ. प्रशांत, डीसीक्यूए डॉ. संजय तथा पिरामल फाउंडेशन के जिला प्रतिनिधि नसीरुल होदा सहित कई स्वास्थ्य अधिकारी मौजूद रहे।
व्यावहारिक कौशल और प्री-टेस्ट पर विशेष ध्यान:
प्रशिक्षण के पहले दिन जिले के सभी 16 प्रखंडों से आईं नर्सों का प्री-टेस्ट लिया गया। इसका उद्देश्य प्रशिक्षण से पूर्व उनके मौजूदा ज्ञान का आकलन करना और बाद में कौशल सुधार का तुलनात्मक रिकॉर्ड तैयार करना है। मास्टर ट्रेनर डॉ. संतोष कुमार, डॉ. श्रुति छाबड़ा एवं डॉ. आशुतोष द्वारा प्रतिभागियों को डमी और मॉडल्स के जरिए हैंड्स-ऑन अभ्यास कराया जा रहा है।
इन प्रमुख बिंदुओं पर हो रहा सघन प्रशिक्षण:
-हाइपोथर्मिया और संक्रमण से बचाव: जन्म के तुरंत बाद शिशु का तापमान नियंत्रित रखने और संक्रमण की रोकथाम के कड़े उपाय।
-बेसिक नवजात पुनर्जीवन: सांस लेने में असमर्थ नवजात को तुरंत आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराना।
-त्वचा से त्वचा संपर्क (केएमसी) एवं स्तनपान: जन्म के तुरंत बाद 'स्किन-टू-स्किन कॉन्टैक्ट' और शीघ्र स्तनपान शुरू कराना।
-रेफरल प्रबंधन: गंभीर शिशुओं की समय पर पहचान, प्राथमिक स्थिरीकरण और सुरक्षा मानकों के साथ उचित केंद्र पर रेफरल।
-एनबीसीसी की भूमिका: नवजात शिशु देखभाल कॉर्नर की सक्रियता और आवश्यक जीवनरक्षक उपकरणों की उपलब्धता।
10 अक्टूबर तक चलेगा चरणबद्ध प्रशिक्षण:
जिला स्वास्थ्य समिति के अनुसार, यह प्रशिक्षण चरणबद्ध तरीके से आयोजित किया जा रहा है। एएनएम के लिए 05 और 06 अक्टूबर, स्टाफ नर्सों के लिए 07 और 08 अक्टूबर तथा चिकित्सा पदाधिकारियों के लिए 09 और 10 अक्टूबर का समय निर्धारित किया गया है।
डीडीपीएम ने कहा कि "प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी, सुरक्षित नवजात और स्वस्थ भविष्य" के संकल्प के साथ यह प्रशिक्षण मुजफ्फरपुर में मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती प्रदान करेगा।
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