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    राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम: चिरैया में रात्रि जांच अभियान शुरू, पहले दिन 80 लोगों के लिए गए रक्त के नमूने

    -​आयुष्मान आरोग्य मंदिर सेनवरिया एकौना में स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों को फाइलेरिया से बचाव के प्रति किया जागरूक, दूर किए कई मिथक

    -​सिविल सर्जन ने 20 वर्ष से ऊपर के सभी लोगों से जांच की अपील की; बताया—रात में सक्रिय होते हैं फाइलेरिया के परजीवी

    मोतिहारी। राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जिले के चिरैया प्रखंड स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर सेनवरिया एकौना के पास गुरुवार की रात 'नाइट ब्लड सर्वे' (एनबीएस) अभियान की शुरुआत की गई। सेंटिनल साइट पर आयोजित इस शिविर में स्वास्थ्य विभाग की टीम और सीएचओ लेड रोगी हितधारक मंच के सदस्यों द्वारा सघन जागरूकता अभियान चलाया गया, जिसके बाद पहले दिन कुल 80 लोगों के रक्त के नमूनों की जांच की गई।

    ​जांच अभियान के दौरान सीएचओ, पीएसपी सदस्य, आशा, एएनएम, वार्ड सदस्य और शिक्षकों ने ग्रामीणों को मच्छरदानी का नियमित उपयोग करने, घर के आसपास साफ-सफाई रखने तथा सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) के समय समय पर दवा खाने के लिए प्रेरित किया। वहीं नए व पुराने हाथीपांव के मरीजों को अंग की स्वच्छता बनाए रखने और नियमित व्यायाम के तरीके सिखाए गए।

    ​शिविर में ग्रामीणों के मन में फाइलेरिया को लेकर उठ रहे सवालों और भ्रांतियों को भी दूर किया गया। "स्वस्थ होने पर जांच क्यों जरूरी है?" और "दवा खाने से क्या लाभ है?" जैसे सवालों के जवाब स्वास्थ्य कर्मियों ने दिए। डीवीडीसीओ डॉ. निकेश कुमार सिंह ने बताया कि चिरैया व संग्रामपुर सहित जिले के विभिन्न प्रखंडों में स्वास्थ्य विभाग, सहयोगी संस्थाओं (पिरामल, सिफार) और जनप्रतिनिधियों के समन्वय से यह अभियान चलाया जा रहा है ताकि फाइलेरिया परजीवी से संक्रमित लोगों की समय रहते पहचान हो सके।

    ​20 वर्ष से ऊपर के सभी व्यक्ति अवश्य कराएं जांच: सिविल सर्जन

    सिविल सर्जन डॉ. दिलीप कुमार एवं डीआईओ डॉ. शरत चन्द्र शर्मा ने बताया कि फाइलेरिया एक अत्यंत गंभीर और लाइलाज बीमारी है, जिससे बचाव का एकमात्र उपाय समय पर दवा का सेवन है। इस बीमारी में हाथीपांव और हाइड्रोसील जैसी स्थायी दिव्यांगता आ जाती है। इसके परजीवी दिन में शरीर के अंदर सुप्त अवस्था में रहते हैं और रात 8 बजे के बाद ही रक्त संचार में सक्रिय होते हैं, इसलिए इसकी जांच रात के समय की जाती है। जांच में पॉजिटिव पाए जाने वाले लोगों का तत्काल उपचार शुरू किया जाता है।

    ​डब्लूएचओ की जोनल कोऑर्डिनेटर माधुरी देवराजू ने कहा कि फाइलेरिया संक्रमित क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलता है, जो गंदे और ठहरे हुए पानी में पनपते हैं। यह बीमारी किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है।

    ​इस अवसर पर सीएचओ रोहित राज, महेश यादव, एएनएम पूनम कुमारी, लैब टेक्नीशियन इश्त्याक अहमद, आशा कार्यकर्ता गिरजा देवी, पूर्व वार्ड सदस्य मणिभूषण प्रसाद, फैसिलिटेटर सीमा देवी, पिरामल प्रतिनिधि पप्पू कुमार, सिफार प्रतिनिधि सिद्धांत कुमार समेत कई स्वास्थ्यकर्मी व ग्रामीण उपस्थित रहे।

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