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    फाइलेरिया उन्मूलन: जिले के 17 प्रखंडों व शहरी क्षेत्र में होगा नाइट ब्लड सर्वे, स्वास्थ्य कर्मियों को मिला प्रशिक्षण

    -रात 10 बजे से शुरू होगा रक्त संग्रह, हर चयनित साइट से लिए जाएंगे 300 नमूने

    -सभी 17 प्रखंडों और नगर क्षेत्र के सेंटिनल व रैंडम साइटों पर तैनात होंगी दक्ष टीमें

    ​सीतामढ़ी। फाइलेरिया उन्मूलन अभियान को धरातल पर प्रभावी बनाने और नाइट ब्लड सर्वे (एनबीएस) को तय गुणवत्ता मानकों के अनुसार संचालित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है। सिविल सर्जन डॉ. आर. के. यादव के नेतृत्व में जिला स्तर पर एक दिवसीय 'ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स' (टीओटी) सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान प्रखंड स्तर के स्वास्थ्य अधिकारियों एवं कर्मियों को रात्रि रक्त पट्ट संग्रह की वैज्ञानिक पद्धति, सैंपलिंग तथा प्रोटोकॉल की विस्तृत जानकारी दी गई।

    ​बैठक में जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. मुकेश कुमार, जिला गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. सुरेंद्र कुमार और डीपीएम विजय चंद्र झा मौजूद रहे। इनके अलावा सभी प्रखंडों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक, प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक और बीएमएंडई सहायकों ने प्रशिक्षण में भाग लिया।

    ​रात 10 बजे से शुरू होगा रक्त संग्रह, प्रत्येक साइट से 300 नमूने होंगे एकत्र:

    ​प्रशिक्षण में बताया गया कि फाइलेरिया परजीवी (माइक्रोफाइलेरिया) की सही पहचान के लिए रक्त पट्ट संग्रह की प्रक्रिया रात 10 बजे के बाद ही शुरू की जाती है। जिले के सभी 17 प्रखंडों और शहरी क्षेत्र में यह सर्वे चलेगा। प्रत्येक प्रखंड में एक सेंटिनल साइट और दो रैंडम साइट निर्धारित की गई हैं। प्रत्येक चयनित साइट से 300-300 लोगों के रक्त नमूने एकत्र कर जांच की जाएगी। इसके लिए फील्ड टीमों को लक्षित आबादी की पहचान, मोबिलाइजेशन, स्लाइड बनाने की सही तकनीक, सुरक्षित लेबलिंग और भंडारण के गुर सिखाए गए।

    ​एक प्रतिशत या अधिक पॉजिटिविटी मिलने पर चलेगा सर्वजन दवा सेवन अभियान:

    ​स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, यदि किसी चयनित साइट पर जांच के दौरान एक प्रतिशत या उससे अधिक फाइलेरिया पॉजिटिव केस मिलते हैं, तो संबंधित पूरे प्रखंड में व्यापक स्तर पर एनबीएस गतिविधि चलाई जाएगी। इससे संक्रमण के सही फैलाव का आकलन कर तत्काल नियंत्रणात्मक कदम उठाए जा सकेंगे। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि फाइलेरिया एक वैश्विक जनस्वास्थ्य समस्या है और वर्तमान में 52 देश इससे प्रभावित हैं। ऐसे में गुणवत्तापूर्ण सर्वे और समय पर पहचान ही इस बीमारी से मुक्ति का मुख्य आधार है।

    ​तकनीकी सहयोग और अंतर-विभागीय समन्वय पर बल:

    ​कार्यशाला में डब्ल्यूएचओ (डब्लूएचओ) की जोनल कोऑर्डिनेटर माधुरी देवराजू, पीरामल फाउंडेशन के कार्यक्रम प्रबंधक प्रभाकर कुमार और लीड रोहित कुमार ने तकनीकी सहभागिता निभाई। जिला मलेरिया कार्यालय के वीडीसीओ पवन कुमार, आरिफ खान, रजनीश कुमार, कमलेश कुमार समेत अन्य कर्मियों ने फील्ड स्तर पर आने वाली चुनौतियों के समाधान पर विचार रखे। सिविल सर्जन ने सभी स्वास्थ्य कर्मियों को निर्देश दिया कि आपसी समन्वय और मजबूत सामुदायिक सहभागिता के जरिए जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाने के लक्ष्य को समय पर पूरा करें।

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