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    ​फाइलेरिया उन्मूलन: जिले के 17 प्रखंडों व शहरी क्षेत्र में होगा नाइट ब्लड सर्वे, चयनित स्थलों से लिए जाएंगे 300-300 सैंपल

    -​एएनएम व आशा कार्यकर्ताओं को दिया गया नाइट ब्लड सर्वे व मातृ-शिशु स्वास्थ्य का विशेष प्रशिक्षण

    ​-सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर तय होगी आगामी फरवरी में एमडीए अभियान की रणनीति

    ​-एनीमिया की समय पर पहचान और गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व देखभाल पर सिविल सर्जन ने दिया जोर

    ​सीतामढ़ी। जिले में फाइलेरिया उन्मूलन अभियान को प्रभावी बनाने तथा मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सक्रिय हो गया है। इसी क्रम में डुमरा शहरी क्षेत्र एवं सुरसंड प्रखंड की 32 एएनएम तथा 56 आशा कार्यकर्ताओं के लिए क्षमता वर्धन प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। सिविल सर्जन डॉ. आर. के. यादव के नेतृत्व में आयोजित इस प्रशिक्षण में आगामी ‘फाइलेरिया रात्रि रक्त पट्ट संग्रह’ (नाइट ब्लड सर्वे) को प्राथमिकता देते हुए स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को आवश्यक तकनीकी निर्देश दिए गए।

    संक्रमण दर के आकलन के लिए जरूरी है रात्रि रक्त संग्रह:

    ​कार्यशाला को संबोधित करते हुए सिविल सर्जन डॉ. आर. के. यादव ने बताया कि फाइलेरिया उन्मूलन के तहत जिले के सभी 17 प्रखंडों और सीतामढ़ी शहरी क्षेत्र में स्थल चिह्नित किए जा रहे हैं। प्रत्येक चयनित स्थल से 300-300 व्यक्तियों के रक्त के नमूने रात में एकत्र किए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस नाइट ब्लड सर्वे से क्षेत्र में फाइलेरिया के वास्तविक संक्रमण की स्थिति और दर का सटीक आकलन संभव हो सकेगा। इसी डेटा के आधार पर आगामी फरवरी माह में संचालित होने वाले ‘सर्वजन दवा सेवन’ (एमडीए) कार्यक्रम की ठोस रणनीति तैयार की जाएगी।

    ​सिविल सर्जन ने आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे चिन्हित गांवों व मोहल्लों में लोगों को पहले से जागरूक करें, ताकि अधिक से अधिक नागरिक आगे आकर रात्रि रक्त जांच करवाएं और अभियान पूरी तरह सफल हो सके।

    ​मातृ मृत्यु दर रोकने को एनीमिया की समय पर पहचान जरूरी:

    ​प्रशिक्षण के दौरान सिविल सर्जन ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर चर्चा करते हुए कहा कि एनीमिया मातृ मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं की समय पर रक्त जांच, आयरन की खुराक और उचित खान-पान सुनिश्चित कराना स्वास्थ्य कर्मियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व तैयारी (एएनसी), सही स्वास्थ्य केंद्र के चयन और आपात स्थिति में एम्बुलेंस सेवाओं की उपलब्धता के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया।

    ​स्वास्थ्य विभाग व सहयोगी संस्थाओं की रही उपस्थिति:

    ​प्रशिक्षण सत्र में परिवार नियोजन के आधुनिक साधनों तथा स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी पहुंच को बेहतर बनाने के तौर-तरीके भी सिखाए गए। इस मौके पर डीपीएम विजय चंद्र झा, डीपीसी दिनेश कुमार, प्रतीक यादव, पिरामल फाउंडेशन के प्रभाकर कुमार, रितु कुमारी, बिकेश कुमार, दुर्गा प्रसाद, राकेश ठाकुर, विक्रांत ध्रुव, रोशन कुमार गिरी, रोडरिक से राजेश कुमार, पीएसआई से विनय कुमार सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मी एवं विभागीय प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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