48 हाई रिस्क गांवों में लगेंगे इंटीग्रेटेड हेल्थ कैंप
-एचआईवी समेत छह तरह की जांच की मिलेगी सुविधा, हाई रिस्क ग्रुप और प्रवासी मजदूरों पर रहेगा फोकस
सीतामढ़ी। जिले में एचआईवी एवं अन्य संक्रामक रोगों की समय पर पहचान और जांच को बढ़ावा देने के लिए इंटीग्रेटेड हेल्थ कैंप अभियान शुरू किया गया। सिविल सर्जन डॉ. आरके यादव, जिला एड्स नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. जेड. जावेद, जिला प्रोग्राम ऑफिसर, जिला आईसीटीसी प्रवेक्षक समेत स्वास्थ्य विभाग के अन्य कर्मियों ने हरी झंडी दिखाकर जागरूकता एवं स्वास्थ्य जांच वाहन दल को रवाना किया।
अभियान के तहत जिले के चिन्हित हाई रिस्क गांवों में स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे। शिविरों में एचआईवी, सिफलिस, हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी, एनीमिया और ब्लड शुगर की जांच की जाएगी। लोगों को बीमारी की समय पर पहचान और आवश्यकता पड़ने पर आगे के उपचार के लिए स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने पर भी जोर रहेगा।
स्वेच्छा से जांच के लिए किया जाएगा प्रेरित:
अभियान के दौरान हाई रिस्क ग्रुप के साथ-साथ प्रवासी मजदूर, वाहन चालक, आईडीयू (इंजेक्शन के माध्यम से नशीली दवाओं का सेवन करने वाले) और अन्य संवेदनशील समूहों को स्वेच्छा से स्वास्थ्य जांच कराने के लिए प्रेरित किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग की टीम लोगों को एचआईवी एवं अन्य संक्रामक रोगों से बचाव, जांच और उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में भी जानकारी देगी।
सितंबर से फरवरी तक चलेगा अभियान:
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार सितंबर 2026 से फरवरी 2027 तक कुल 48 हाई रिस्क गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे। शिविरों के माध्यम से ग्रामीण स्तर पर लोगों को जांच की सुविधा उपलब्ध कराने के साथ स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जाएगा। अभियान का उद्देश्य जांच को लोगों के करीब पहुंचाना और बीमारी की समय पर पहचान के जरिए जरूरतमंदों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना है।
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