सीतामढ़ी सदर अस्पताल बना एमएनसीयू और एलएमयू वाला जिला अस्पताल
सीतामढ़ी। जिला अस्पताल ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। नवजात बच्चों को बेहतर और आधुनिक चिकित्सा सेवा देने वाला एसएनसीयू अब मदर-न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एमएनसीयू) के रूप में तब्दील हो गया है। इसके साथ ही यहां लैक्टेशन मैनेजमेंट यूनिट (एलएमयू) की भी शुरुआत की गई है। बीते एक जुलाई को जिलाधिकारी रिची पांडे ने इस अनूठी व्यवस्था का विधिवत उद्घाटन किया। इस दोहरी सुविधा को एक साथ शुरू करने वाला सीतामढ़ी सदर अस्पताल बिहार का पहला जिला अस्पताल बन गया है।
वार्मर के बगल में ही सजेगा मां का आंचल:
अब तक एसएनसीयू में शून्य से 28 दिन तक के बीमार व कुपोषित नवजात बच्चों को रेडियंट वॉर्मर या फोटोथेरेपी मशीन पर अकेले रखा जाता था, जबकि मां बाहर दूसरे वार्ड में इंतजार करती थी। लेकिन अब केंद्र व राज्य सरकार के निर्देश पर वार्मर के ठीक बगल में मां के लिए भी बेड लगा दिया गया है।
चिकित्सकीय शोध बताते हैं कि मां और बच्चे के एक साथ रहने और कंगारू मदर केयर (केएमसी) मिलने से बच्चे बहुत तेजी से रिकवर होते हैं। साथ रहने से मां के शरीर में ऑक्सीटोसिन हार्मोन एक्टिव होता है, जिससे दूध जल्दी और पर्याप्त मात्रा में उतरता है। इससे मां-बच्चे का भावनात्मक जुड़ाव भी मजबूत होता है।
जो बच्चे खुद नहीं पी सकते, उन्हें मिलेगा संरक्षित मां का दूध:
अस्पताल में शुरू हुई लैक्टेशन मैनेजमेंट यूनिट (एलएमयू) उन बच्चों के लिए वरदान साबित होगी, जो जन्म के समय कमजोर होने के कारण खुद से मां का दूध नहीं पी पाते हैं। इस यूनिट में ऐसी माताओं का दूध विशेष तकनीक से निकालकर (मिल्क एक्सप्रेशन) सुरक्षित तापमान पर फ्रीज या डी-फ्रीजर में स्टोर किया जाएगा। इसके लिए अस्पताल में मिल्क एक्सप्रेशन एरिया, स्टोरेज एरिया, स्टरलाइजेशन एरिया, डिनर एरिया और वॉश एरिया जैसी विश्वस्तरीय व्यवस्था की गई है।
12 से बढ़कर 20 बेड का होगा एमएनसीयू:
एमएनसीयू के नोडल अधिकारी डॉ. हिमांशु शेखर ने बताया कि फिलहाल यह यूनिट 12 बेड की है, जिसे जल्द ही बढ़ाकर 20 बेड का किया जाएगा। उन्होंने इस सफलता का श्रेय अपनी पूरी टीम को दिया, जिसमें डॉ. अमजद, डॉ. सौरभ, डॉ. मिथुन, डॉ. अंकुर, डॉ. राहुल समेत डीएनबी प्रशिक्षु डॉ. अभय, नीतीश व मेहुल शामिल हैं। वहीं नर्सिंग ऑफिसर शारदा, कविता, पल्लवी, मोनिका, विभा, अज़हर, खुशबू और अंजलि ने भी इसके लिए दिन-रात एक किया।
इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति:
इस ऐतिहासिक मौके पर यूनिसेफ बिहार के डॉ. तारिक अहमद, डॉ. अंशुमान, सिविल सर्जन डॉ. रवींद्र कुमार यादव, डीएस डॉ. मनोज कुमार और अस्पताल प्रबंधक विजय चंद्र झा प्रमुख रूप से उपस्थित रहे और टीम की पीठ थपथपाई।
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