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    बिहार की तीन विभूतियों को पद्मश्री सम्मान मिलने पर मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने जताया हर्ष

    -लोक नृत्य, भोजपुरी लोक संगीत एवं कृषि विज्ञान के क्षेत्र में योगदान को मिली राष्ट्रीय पहचान

    -स्वर्गीय विश्व बंधु एवं भरत सिंह भारती के योगदान को बताया बिहार की सांस्कृतिक धरोहर

    पटना। कला एवं संस्कृति मंत्री, डॉ. प्रमोद कुमार ने लोक नृत्य, भोजपुरी लोक संगीत एवं कृषि विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली बिहार की तीन विभूतियों को पद्मश्री सम्मान मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की है।

    उन्होंने भरत सिंह भारती, विश्व बंधु (मरणोपरांत) एवं प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक डॉ. गोपाल जी त्रिवेदी (मरणोपरांत) को शुभकामनाएं दीं।

    मंत्री ने कहा कि यह सम्मान पूरे बिहार के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि पटना के रहने वाले स्वर्गीय विश्व बंधु ने बिहार की विवाह परंपराओं से जुड़े लोकनृत्य ‘डोमकच’ को जीवंत बनाए रखने में अतुलनीय भूमिका निभाई। लोक संस्कृति और लोकनृत्य के संरक्षण एवं संवर्धन में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। स्वर्गीय विश्व बंधु बिहार के एक अत्यंत प्रतिष्ठित लोक कलाकार और नृत्य गुरु थे। वे अपनी विशिष्ट लोक नृत्य शैली के लिए देशभर में प्रसिद्ध रहे। उन्होंने अपने जीवनकाल में पांच हजार से अधिक शिष्यों को नृत्य की विधाओं में पारंगत किया और लोक नृत्य को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उनका मरणोपरांत पद्मश्री से सम्मानित होना उनकी अमूल्य कला-साधना और आजीवन योगदान का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान है।

    उन्होंने कहा कि भरत सिंह भारती, भोजपुरी लोक संगीत के सशक्त स्तंभ माने जाते हैं। कला के क्षेत्र में उनके छह से सात दशकों के विशिष्ट योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। वर्ष 1962 से आकाशवाणी पटना से जुड़े श्री भारती ने भोजपुरी लोक परंपरा को जीवंत बनाए रखा। उन्होंने भिखारी ठाकुर और महेंद्र मिसिर की लोकशैली को अपने गायन के माध्यम से नई पहचान दी और पीढ़ियों तक पहुंचाया।

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