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    जिले में एनीमिया मुक्त अभियान को मिली नई गति

    -गंभीर एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं के उपचार हेतु एफसीएम प्रशिक्षण आयोजित

    -सभी प्रखंडों से पहुंचे चिकित्सा पदाधिकारी और एएनएम

    मुजफ्फरपुर। जिला स्वास्थ्य समिति के प्रशिक्षण सभागार में एनीमिया मुक्त कार्यक्रम के अंतर्गत एफसीएम (फेरिक कार्बोक्सी माल्टोज) प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण का संचालन मास्टर प्रशिक्षक डॉ. प्रेरणा सिंह एवं पिरामल फाउंडेशन, मुजफ्फरपुर के जिला प्रतिनिधियों द्वारा किया गया। कार्यक्रम में जिले के सभी प्रखंडों से एक-एक चिकित्सा पदाधिकारी तथा दो-दो एएनएम ने भाग लिया।

    मातृ मृत्यु दर में कमी लाने पर जोर:

    प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य जिले में चिन्हित अति गंभीर एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं का समयबद्ध एवं प्रभावी उपचार सुनिश्चित करना है। एफसीएम डोज के माध्यम से गर्भवती महिलाओं के हीमोग्लोबिन स्तर को कम समय में सामान्य बनाने का प्रयास किया जाएगा। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान गंभीर एनीमिया मां और शिशु दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है, इसलिए इसकी शीघ्र पहचान और उपचार बेहद आवश्यक है।

    एफसीएम डोज और सुरक्षा प्रबंधन की दी गई जानकारी:

    प्रशिक्षण सत्र के दौरान प्रतिभागियों को एफसीएम डोज की गणना, गर्भवती महिलाओं की वाइटल जांच, संभावित साइड इफेक्ट की पहचान एवं उनके त्वरित प्रबंधन के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही एफसीएम डोज देने के बाद कम-से-कम 30 मिनट तक निगरानी रखने के महत्व पर भी विशेष बल दिया गया। यह तकनीकी प्रशिक्षण क्लीनिकल मेंटर सुश्री श्वेता विक्टर द्वारा पीपीटी प्रेजेंटेशन और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से दिया गया।

    स्वास्थ्य संस्थानों में प्रशिक्षण विस्तार के निर्देश:

    प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. पी. एन. वर्मा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार मातृ स्वास्थ्य को मजबूत बनाने के लिए एनीमिया मुक्त अभियान को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने सभी प्रखंड स्तरीय चिकित्सा पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने अधीनस्थ स्वास्थ्य संस्थानों में कार्यरत एएनएम एवं स्वास्थ्यकर्मियों को भी एफसीएम उपचार प्रबंधन का प्रशिक्षण दें, ताकि इसका लाभ अंतिम स्तर तक पहुंच सके।

    नियमित मॉनिटरिंग और फॉलोअप पर विशेष बल:

    कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय दिशा-निर्देशों, सुरक्षित एफसीएम प्रशासन प्रक्रिया और रिपोर्टिंग प्रणाली की जानकारी भी दी गई। साथ ही कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रखंड स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग एवं फॉलोअप को आवश्यक बताया गया।

    इस अवसर पर प्रभारी जिला अनुश्रवण एवं मूल्यांकन पदाधिकारी अमित कुमार, प्रभारी जिला सामुदायिक उत्प्रेरक डॉ. प्रशांत, पिरामल फाउंडेशन के प्रतिनिधि ऋतु सिंह, नासिरुल होदा, राजीव, अंकित, आदित्या गांधी फेलो सहित कई स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।

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