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    एईएस पर डीएम सख्त: "373 पंचायतों में अधिकारियों ने थामा कमान, जागरूकता अभियान ने पकड़ी रफ्तार"

    -" अस्पताल से लेकर वाहन टैगिंग एवं कंट्रोल रूम तक पुख्ता इंतजाम: एईएस से निपटने को प्रशासन पूरी तरह तैयार" 

    -"जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ की बड़ी बैठक: अलर्ट मोड में सक्रिय एवं तत्पर होकर कार्य करने दी कड़ी हिदायत" 

    मुजफ्फरपुर। जिले में एईएस/जेई (चमकी बुखार) की रोकथाम एवं प्रभावी नियंत्रण को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। इसी क्रम में जिलाधिकारी श्री सुब्रत कुमार सेन की अध्यक्षता में समाहरणालय सभागार में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में स्वास्थ्य, परिवहन, शिक्षा, आईसीडीएस, जीविका सहित अन्य विभागों के अधिकारियों की उपस्थिति में अब तक की तैयारियों और व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की गई तथा आगे की रणनीति तय की गई।

    बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट रूप से कहा कि एईएस/जेई जैसे संवेदनशील विषय पर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी अधिकारियों को अलर्ट एवं केयरफुल रहने के साथ-साथ मिशन मोड में सक्रिय एवं तत्पर होकर कार्य करने का सख्त निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि यह केवल स्वास्थ्य विभाग का दायित्व नहीं है, बल्कि सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ काम करना होगा ताकि एक भी बच्चा इस बीमारी की चपेट में न आए।

    वाहन टैगिंग और एम्बुलेंस व्यवस्था सुदृढ़:

    मरीजों को त्वरित इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिले के सभी 373 पंचायतों में कुल 2575 वाहनों की प्रखंडवार/ पंचायतवार टैगिंग कर दी गई है ताकि लोगों को स्थानीय स्तर पर ही सरकारी खर्चे से निकटतम स्वास्थ्य केंद्र तक मरीज को त्वरित एवं सहज रूप में पहुंचाने की निशुल्क सुविधा उपलब्ध हो सके।   इन वाहनों का भुगतान सरकारी दर के अनुसार दूरी के हिसाब से ₹400 से ₹1000 तक किया जाएगा।

    इसके अलावा जिले में वर्तमान में कुल 77 एम्बुलेंस कार्यरत हैं, जिन्हें पूरी तरह सक्रिय रखा गया है। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि प्रखंडवार और पंचायतवार टैग किए गए वाहनों की सूची संबंधित क्षेत्रों में उपलब्ध कराई जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल संपर्क कर मरीजों को बिना  देर किये निकटतम अस्पताल पहुंचाया जा सके।

    बच्चों पर विशेष निगरानी, घर-घर सर्वे:

    एईएस का सबसे अधिक प्रभाव बच्चों पर पड़ता है, इसे ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक स्तर पर 0 से 15 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों पर विशेष निगरानी की व्यवस्था की है। घर-घर सर्वे के माध्यम से पूरे जिले में इस आयु वर्ग के कुल 11,32,513 बच्चों का डेटा तैयार किया गया है। इनमें से 3164 बच्चों को चिन्हित कर विशेष निगरानी की जा  रही है।

    जिलाधिकारी ने सिविल सर्जन को निर्देश दिया है कि जिले से लेकर प्रखंड स्तर तक सभी स्वास्थ्य कर्मियों एवं संबंधित अधिकारियों का प्रशिक्षण एवं क्षमता वर्धन सुनिश्चित किया जाए।   जिले में अब तक 25,368 अधिकारियों एवं कर्मियों का प्रशिक्षण कराया जा चुका है। साथ ही सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे पंचायत स्तर पर भी कर्मियों का प्रशिक्षण सुनिश्चित करें और नियमित रूप से इसकी मॉनिटरिंग करें।

    12 मामले रिपोर्टेंड, सभी मरीज स्वस्थ होकर घर लौटे:

    बैठक में एईएस के मामलों की समीक्षा के दौरान बताया गया कि अब तक जिले में कुल 16 मामले सामने आए हैं, जिनमें से 12 मामले मुजफ्फरपुर जिले के हैं। अन्य मामलों में शिवहर के 2, सारण का 1 और गोपालगंज का 1 मामला शामिल है। राहत की बात यह है कि सभी मरीजों का समुचित इलाज किया गया और उन्हें स्वस्थ होने के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया है।

    जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि किसी भी नये मामले की सूचना तुरंत दी जाए और मरीज को बिना देरी के उचित उपचार उपलब्ध कराया जाए।

    कंट्रोल रूम और त्वरित सहायता की सुदृढ़ व्यवस्था:

    मरीजों और उनके परिजनों को त्वरित सहायता प्रदान करने के लिए जिला से लेकर प्रखंड स्तर तक नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं। सदर अस्पताल, एसकेएमसीएच और आपातकालीन संचालन केंद्र में कंट्रोल रूम 24 घंटे क्रियाशील हैं। इसके साथ ही प्रत्येक प्रखंड में भी कंट्रोल रूम गठित किए गए हैं, ताकि जरूरतमंद लोगों को तुरंत सहायता मिल सके।

    सदर अस्पताल का नियंत्रण कक्ष-

    0621-2266055

    0621-2266056

    एसकेएमसीएच-

    0621-2233868

    आपातकालीन संचालन केंद्र का नियंत्रण कक्ष-

    0621-2212007

    छह समन्वय समितियों का हुआ गठन: 

    एईएस के प्रभावी नियंत्रण के लिए जिलाधिकारी ने छह अलग-अलग समन्वय समितियों का गठन किया है, जिनमें अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है। इनमें चिकित्सकीय संसाधन प्रबंधन कोषांग, क्षमता वर्धन एवं प्रशिक्षण कोषांग, प्रचार-प्रसार एवं जन जागरूकता कोषांग, एम्बुलेंस सेवा एवं त्वरित परिवहन कोषांग, नियंत्रण कक्ष एवं क्यूआरटी, तथा अनुश्रवण एवं मूल्यांकन कोषांग शामिल हैं। ये सभी कोषांग अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए समन्वय के साथ कार्य कर रही हैं।

    जागरूकता अभियान को मिली रफ्तार:

    जिलाधिकारी ने कहा कि एईएस से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय जागरूकता है। संध्या चौपाल, प्रभात फेरी, घर-घर भ्रमण जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। अब तक 1 लाख हैंडबिल और 200 स्टीकर का वितरण किया जा चुका है।

    सप्ताहवार कार्यक्रम के तहत सोमवार और गुरुवार को प्रभात फेरी, मंगलवार को महादलित टोले में गृह भ्रमण, बुधवार और शुक्रवार को वीएचएसएनडी के दौरान जागरूकता कार्यक्रम, तथा शनिवार को संध्या चौपाल आयोजित की जा रही है। आंगनबाड़ी सेविका, सहायिका, जीविका दीदी एवं स्कूली बच्चों के माध्यम से भी जन-जागरूकता अभियान को गति दी जा रही है।

    हर शनिवार संध्या चौपाल अनिवार्य:

    जिलाधिकारी ने सभी 373 पंचायतों में अधिकारियों की तैनाती कर हर शनिवार को संध्या चौपाल आयोजित करने का सख्त निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि यह केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि एक प्रभावी माध्यम है, जिसके जरिए गांव-गांव तक सही जानकारी पहुंचाई जा सकती है। इस अभियान की शुरुआत पिछले शनिवार से सफलतापूर्वक हो चुकी है।

    जिलाधिकारी की अपील:

    जिलाधिकारी ने जिलेवासियों से अपील करते हुए कहा कि एईएस से बचाव के लिए सतर्कता और जागरूकता बेहद जरूरी है। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि बच्चों को खाली पेट न सुलाएं, उन्हें पर्याप्त पोषण दें और किसी भी प्रकार के लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन पूरी तरह से तैयार है, लेकिन जनसहयोग के बिना इस बीमारी पर नियंत्रण संभव नहीं है। सभी लोग मिलकर इस अभियान को सफल बनाएं, ताकि जिले को एईएस मुक्त बनाया जा सके।

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