किसी भी प्रकार का खबर व विज्ञापन के लिए सम्पर्क करे 6201984873

  • Breaking News

    सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ वैशाली में महाअभियान: 101 किशोरियों को लगा एचपीवी का दूसरा डोज, गार्डासिल को लेकर छात्राओं को किया गया जागरूक

    -101 किशोरियों को दिया गया एचपीवी की दूसरी खुराक 

    -सर्वाइकल कैंसर से आजीवन बचाव करता है ग्राडासील 

    ​हाजीपुर। जिले की बेटियों को कैंसर जैसी घातक बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग का अभियान अब तेज हो गया है। इसी कड़ी में हाजीपुर के शैल विद्या निकेतन में विशेष टीकाकरण और जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान 101 किशोरियों को एचपीवी  वैक्सीन की दूसरी खुराक दी गई, जिससे उनका सुरक्षा चक्र अब पूरा हो गया है। वहीं, शिविर में मौजूद 100 से अधिक छात्राओं और अभिभावकों को 'गार्डासिल' वैक्सीन के महत्व पर विस्तार से जागरूक किया गया, ताकि वे इस गंभीर बीमारी के प्रति सतर्क रह सकें।

    ​शिविर में ही दो किशोरियों को लगाई गई गार्डासिल वैक्सीन:

    ​जागरूकता का असर कार्यक्रम के दौरान ही देखने को मिला, जहाँ ओरिएंटेशन के तुरंत बाद दो किशोरियों को गार्डासिल का टीका लगाया गया। जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी  डॉ. विशाल प्रकाश ने बताया कि महिलाओं में मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारण सर्वाइकल कैंसर है, जिसे केवल समय पर टीकाकरण के जरिए ही रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि गार्डासिल वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है और 14 से 15 वर्ष की आयु में इसे लगवाना सबसे प्रभावी साबित होता है।

    ​प्रचार-प्रसार पर जोर: अब हर अस्पताल में सुबह 9 से शाम 5 बजे तक सुविधा

    ​डॉ. विशाल प्रकाश ने जानकारी दी कि जिले में गार्डासिल के प्रचार-प्रसार के लिए विशेष रणनीति तैयार की गई है। अब यह वैक्सीन केवल जिला मुख्यालय ही नहीं, बल्कि सदर अस्पताल के साथ-साथ सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों  और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों  में भी उपलब्ध है। किसी भी कार्य दिवस पर सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक किशोरियां यहाँ जाकर टीकाकरण करा सकती हैं। विभाग का लक्ष्य है कि स्कूलों और गांवों में सघन प्रचार कर हर परिवार को इस टीके की महत्ता समझाई जाए।

    ​भविष्य की सुरक्षा के लिए गार्डासिल है जरूरी:

    जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ विशाल प्रकाश ने बताया कि सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण 'ह्यूमन पेपिलोमा वायरस' है। गार्डासिल टीका इसी वायरस के चार वैरिएंट 6,11,16,18 खिलाफ शरीर में एंटीबॉडी तैयार करता है। भारत में ग्राडासील पिछले 20 सालों से प्रचलन में है। देश के अधिक साक्षरता दर वाले राज्यों में ग्राडासील की स्वीकार्यता सबसे ज्यादा है।  डॉ प्रकाश ने अपील की कि अभिभावक इसे बोझ न समझें, बल्कि अपनी बेटियों के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य के लिए एक आवश्यक निवेश समझें। शैल विद्या निकेतन में बड़ी संख्या में बच्चों का टीकाकृत होना और ओरिएंटेशन कार्यक्रम में भाग लेना जिले के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

    No comments

    Post Top Ad

    ad728

    Post Bottom Ad

    ad728