टीबी उन्मूलन के लिए 100 दिनों का टीबी मुक्त भारत अभियान शुरू, 11055 गांवों में होगी स्क्रीनिंग
•अभियान में 185 अल्ट्रा-पोर्टेबल हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनें होंगी इस्तेमाल
•राज्य में 91 सीबी-नाट और 560 ट्रू-नाट मशीनें सक्रिय
पटना। राज्य टीबी उन्मूलन के संकल्प के साथ एक निर्णायक भविष्य की ओर बढ़ रहा है। देश में चलाए जा रहे टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत राज्य भी जमीनी स्तर पर व्यापक प्रयास कर रहा है। राज्य में सरकारी स्वास्थ्य तंत्र और जन-भागीदारी के अटूट समन्वय से इस बीमारी को जड़ से मिटाने की कोशिश की जा रही है जिसमें निक्षय मित्र, एक्टिव केस फाइंडिंग, निक्षय पोषण योजना और टीबी मुक्त पंचायत जैसे अभियान महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
राज्य स्वास्थ्य समिति के अपर कार्यपालक निदेशक कुमार गौरव ने कहा कि राज्य में विश्व टीबी दिवस के अवसर पर '100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान' की शुरुआत की गयी है। इस अभियान के तहत राज्य के 11 हजार 55 उच्च जोखिम वाले गांवों और वार्डों में रहने वाले हर एक नागरिक की स्क्रीनिंग का लक्ष्य है। इस अभियान का लक्ष्य केवल मरीजों को ढूंढना नहीं, बल्कि जन भागीदारी के माध्यम से 37 प्रकार के संवेदनशील समूहों को सुरक्षा कवच प्रदान करना और नए मामलों के प्रसार को पूरी तरह समाप्त करना है। विभाग ने मेडिकल कॉलेजों से लेकर आयुष्मान आरोग्य मंदिरों तक 34.5 लाख से अधिक लोगों की जांच का लक्ष्य रखा है।
आधुनिक एक्स रे मशीनों और 'निक्षय वाहनों' से मिलेगी गति:
टीबी जांच प्रक्रिया को तेज करने के लिए 185 अल्ट्रा-पोर्टेबल हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों के जरिए दुर्गम इलाकों में भी टीबी की सटीक जांच सुनिश्चित की जा रही है। इसके अलावा 396 पीपीपी मोड और 96 इन-हाउस केंद्रों पर एक्स-रे की सुविधा मिल रही है। 'मोबाइल हेल्थ टीम' के जरिए गांवों में ही एआई तकनीक युक्त अल्ट्रा-पोर्टेबल हैंड-हेल्ड एक्स रे मशीनों (185) द्वारा स्क्रीनिंग एवं 91 सीबीनैट और 560 ट्रूनैट मशीनों का उपयोग जाँच के लिए किया जाएगा। रेडियोग्राफर्स को प्रतिदिन कम से कम 100 एक्स-रे करने का लक्ष्य दिया गया है।
चूँकि टीबी का प्रकोप मधुमेह के रोगियों एवं कुपोषित लोगों में ज्यादा होता है। अतः टीबी के साथ-साथ ब्लड सुगर, ब्लड प्रेशर, हीमोग्लोबिन, बी.एम.आई. की भी जाँच की जा रही है।
गंभीर मरीजों के लिए अस्पतालों में बेड रिजर्व:
सरकार ने 'डिफ्रेंसिएटेड' टीबी केयर' के तहत गंभीर मरीजों के लिए जिला अस्पतालों में कम से कम 2 बेड आरक्षित करने के निर्देश दिए हैं। सांस लेने में तकलीफ या तेज बुखार जैसे लक्षणों वाले मरीजों को तुरंत भर्ती किया जाएगा। हर महीने मरीजों का 16 स्वास्थ्य मानकों पर निगरानी होगी। 'निक्षय पोषण योजना' अंतर्गत एक हजार रूपये प्रतिमाह प्रोटीन युक्त पोषक आहार के लिए सीधे मरीजों के खातों में भेजा जा रहा है इसके अतिरिक्त 'निक्षय मित्रों' के जरिए उन्हें फूड बास्केट दी जाएगी।
उच्च जोखिम वाले समूहों पर होगी विशेष नजर:
अभियान के दौरान उच्च जोखिम वाले समूहों पर विशेष नजर होगी, जिन्हें संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा है। इनमें पिछले 2 साल में टीबी का इलाज करा चुके लोग, उनके परिजन, एचआईवी, कैंसर, किडनी और ट्रांसप्लांट के मरीज शामिल हैं। साथ ही, जेलों, हॉस्टलों, खदानों, निर्माण स्थलों पर काम करने वाले मजदूरों, कुपोषित बच्चों, बुजुर्गों और धूम्रपान करने वालों की सघन टीबी जांच '10-एस' (10 लक्षणों) के आधार पर की जा रही है।
हर दिन देनी होगी अभियान की प्रगति:
अभियान के बेहतर क्रियान्वयन के लिए जिला स्तर पर सीडीओ और सिविल सर्जन द्वारा नियमित तौर पर कार्यक्रम की समीक्षा की जा रही है। जिसमें हर ब्लॉक को स्क्रीनिंग संबंधी कार्यों का विवरण निक्षय पोर्टल' पर एंट्री करने के निर्देश दिए गए हैं।
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