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    साइलेंट किलर' हाइपरटेंशन के खिलाफ अब हर गांव में हथियार

    -अब प्रत्येक सीएचसी में मिलेगी ईसीजी की सुविधा 

    -हृदय रोग के गंभीरता के बारे में मिलती है सटीक जानकारी

    मुजफ्फरपुर। मुजफ्फरपुर के ग्रामीण इलाकों में अब स्वास्थ्य विभाग की एक नई पहल जीवनरक्षक साबित हो रही है। जिस ईसीजी सुविधा के लिए पहले मरीजों को बड़े शहरों या महंगे निजी अस्पतालों की दौड़ लगानी पड़ती थी, वह अब प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक सुलभ हो गई है। यह कदम विशेष रूप से हाइपरटेंशन यानी उच्च रक्तचाप से जूझ रहे मरीजों के लिए एक वरदान की तरह है, जिसे अक्सर 'साइलेंट किलर' कहा जाता है।

    ​आपातकालीन स्थिति में तकनीक का कमाल:

    सिविल सर्जन डॉ सुधीर कुमार ने बताया कि ​हाल ही में कांटी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक ऐसा मामला सामने आया जिसने इस सुविधा की सार्थकता सिद्ध कर दी। एक मरीज जब सीने में भारीपन और अत्यधिक पसीने की शिकायत लेकर पहुंचा, तो उसका रक्तचाप काफी बढ़ा हुआ था। वहां तैनात स्वास्थ्य कर्मियों ने आधुनिक डिजिटल ईसीजी मशीन का उपयोग किया, जिसने तत्काल हृदय में 'ब्लॉकेज' के संकेत देते हुए रेड अलर्ट जारी कर दिया। अस्पताल की नर्स के अनुसार, मशीन की त्वरित पहचान की वजह से ही मरीज को समय रहते बड़े अस्पताल भेजा जा सका और उसकी जान बच गई।

    ईसीजी की महत्ता और विशेषज्ञों की राय:

    जिला कार्यक्रम प्रबंधक रेहान अशरफ ने कहा कि ​चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार ईसीजी मात्र 5 से 10 मिनट के भीतर हृदय की विद्युत गतिविधियों का सटीक विवरण दे देती है। हाइपरटेंशन के ऐसे मरीज जिनमें लक्षण स्पष्ट नहीं होते, उनके लिए यह जांच छिपे हुए खतरों को पहचानने का सबसे सशक्त माध्यम है। डॉक्टरों के अनुसार, इस तकनीक से यह स्पष्ट हो जाता है कि किस मरीज को तत्काल इंजेक्शन की आवश्यकता है और किसे उच्च चिकित्सा केंद्र के लिए रेफर करना जरूरी है।

    ​जनहित में जारी संदेश और सावधानी:

    ​स्वास्थ्य विभाग ने आम जनता, विशेषकर 30 वर्ष से अधिक आयु के लोगों और मधुमेह या रक्तचाप के रोगियों को सतर्क रहने की सलाह दी है। यह समझना आवश्यक है कि सीने में हल्का भारीपन या घबराहट भी गंभीर संकेत हो सकते हैं। चूंकि अब सरकारी अस्पतालों में यह सुविधा पूरी तरह निःशुल्क या बहुत कम शुल्क पर उपलब्ध है, इसलिए समय पर जांच करवाकर किसी भी बड़े जोखिम से बचा जा सकता है। वास्तव में, जागरूकता ही वह सबसे बड़ा बचाव है जो परिवारों को बड़ी मुश्किलों से सुरक्षित रख सकता है।

    फरवरी माह में प्रखंडवार ईसीजी की स्थिति:

    सीएचसी औराई- 12

    सीएचसी बांद्रा- 30

    सीएचसी बोचहा- 96

    सीएचसी गायघाट- 25

    सीएचसी कांटी- 68

    सीएचसी कटरा- 59

    सीएचसी कुढ़नी- 18

    सीएचसी मीनापुर- 39

    सीएचसी मोतीपुर- 60

    सीएचसी मुरौल- 47

    सीएचसी मुसहरी- 15

    सीएचसी पारू- 43

    सीएचसी साहेबगंज- 33

    सीएचसी सरैया- 41

    सदर अस्पताल- 269

    पीएचसी मड़वन- 52

    आर एच सकरा- 26


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