एईएस से निपटने को जिला तैयार: जिलाधिकारी के नेतृत्व में ‘चमकी’ को हराने का संकल्प
-सिविल सर्जन की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक; सदर अस्पताल में 10 और सभी पीएचसी में 2-2 बेड का एईएस वार्ड हुआ तैयार
-अब व्हाट्सएप और जीपीएस से होगी एईएस वार्ड के डॉक्टरों की निगरानी, 24 घंटे अलर्ट पर कंट्रोल रूम
मुजफ्फरपुर। सिविल सर्जन कार्यालय में बुधवार को सिविल सर्जन डॉ सुधीर कुमार की अध्यक्षता में एईएस समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में एईएस वार्ड में दवा और उपकरणों को उपलब्धता, चिकित्सक एवं पैरामेडिकल कर्मी की उपस्थिति एवं विभिन्न स्तरों पर किए जाने वाले आईईसी एक्टिविटी की गहन समीक्षा की गई। समीक्षा के क्रम में पाया गया कि सदर अस्पताल मुजफ्फरपुर में दस बेड का एईएस वार्ड एवं सभी सीएचसी/पीएचसी में दो बेड का एईएस वार्ड तैयार है, जिसमें सभी आवश्यक दवाएं एवं उपकरण उपलब्ध है। एईएस वार्ड में कार्य करने वाले डॉक्टर एवं पैरामेडिकल कर्मी का प्रशिक्षण पूरा कर लिया गया है। 18 मार्च से एईएस वार्ड में कार्यरत डॉक्टर एवं पैरामेडिकल कर्मी की जीपीएस लोकेशन युक्त उपस्थिति का अनुश्रवण व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से शुरू कर दिया गया है। जिला मुख्यालय एवं स्वास्थ्य केंद्रों में 24*7 कंट्रोल रूम कार्यरत है। आंगनबाड़ी सेविका द्वारा 0-15 वर्ष के बच्चों का सर्वे कराया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है। जिलाधिकारी महोदय द्वारा विभिन्न स्तरों पर लगातार समीक्षा की जा रही है एवं आवश्यक दिशानिर्देश दिया जा रहा है। जिलाधिकारी के नेतृत्व में मुजफ्फरपुर ने थाना है “हर बच्चे को चमकी से बचाना है”।
चमकी के लक्षणः-
● सरदर्द, तेज बुखार आना जो 5-7 दिनों से ज्यादा का ना हो
● अर्द्ध चेतना एवं मरीज में पहचानने की क्षमता नहीं होना/भ्रम की स्थिति में होना/बच्चे का बेहोश हो जाना।
● शरीर में चमकी होना अथवा हाथ पैर में थरथराहट होना।
● पूरे शरीर या किसी खास अंग में लकवा मारना या हाथ पैर का अकड़ जाना।
● बच्चे का शारीरिक एवं मानसिक संतुलन ठीक नहीं होना।
● उपरोक्त लक्षणों में से कोई भी लक्षण दिखने पर अविलंब अपने गांव की आशा/एएनएम दीदी से संपर्क कर अपने सबसे निकटतम स्वास्थ्य केन्द्र पर जाकर चिकित्सीय परामर्श लें। इसके उपरांत ही सदर अस्पताल/मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बच्चों को ईलाज हेतु ले जायें।
सामान्य उपचार एवं सावधानियांः-
● अपने बच्चों को तेज धूप से बचाएं। घर से बाहर जाने पर सर पर टोपी या गीला गमछा रखें।
● अपने बच्चों को दिन में दो बार स्नान कराएं।
रात में बच्चों को भरपेट खाना खिलाकर ही सुलाएं।
● गर्मी के दिनों में बच्चों को ओआरएस अथवा नमक-चीनी एवं नींबू पानी से शरबत बनाकर पिलायें।
● रात में सोते समय घर की खिड़कियां एवं रौशनदान को खोल दें, ताकि हवा का आवागमन होता रहे।
ध्यान देने वाली बातेंः-
क्या करेंः-
● तेज बुखार होने पर पूरे शरीर को ताजे पानी से पोछें एवं पंखा से हवा करें ताकि बुखार 100 डिग्री से कम हो सके।
● पारासिटामोल की गोली/सीरप मरीज को चिकित्सीय सलाह पर दें।
● यदि बच्चा बेहोश नहीं है तब साफ एवं पीने योग्य पानी में ओआरएस का घोल बनाकर पिलायें।
बेहोशी/मिर्गी की अवस्था में बच्चे को छायादार एवं हवादार स्थान पर लिटाएं।
● चमकी आने पर, मरीज को बाएं या दाएं करवट में लिटाकर तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाएं।
● बच्चे के शरीर से कपड़े हटा लें एवं गर्दन सीधा रखें।
अगर मुंह से लार या झाग निकल रहा हो तो साफ कपड़े से पोछें, जिससे कि सांस लेने में कोई दिक्कत ना हो।
● तेज रोशनी से बचाने के लिए मरीज की अंखों को पट्टी या कपड़े से ढंकें।
क्या ना करेंः-
● बच्चे को कम्बल या गर्म कपड़ों में न लपेंटे।
● बच्चे की नाक बंद नहीं करें।
● बेहोशी/मिर्गी की अवस्था में बच्चे के मुंह से कुछ भी न दें।
● बच्चे का गर्दन झुका हुआ नहीं रखें।
● चूंकि यह दैविक प्रकोप नहीं है बल्कि अत्यधिक गर्मी एवं नमी के कारण होने वाली बीमारी है अतः बच्चे के ईलाज में ओझा गुणी में समय नष्ट न करें।
● मरीज के बिस्तर पर ना बैठें तथा मरीज को बिना वजह तंग न करें।
● ध्यान रहे कि मरीज के पास शोर न हो और शांत वातावरण बनायें रखें।
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● खिलायें-बच्चे को रात में सोने से पहले भरपेट खाना जरूर खिलाएं। यदि संभव हो तो कुछ मीठा भी खिलायें।
● जगायें-रात के बीच में एवं सुबह उठते ही देखें कि कहीं बच्चा बेहोश या उसे चमकी तो नहीं।
● अस्पताल ले जायें-बेहोशी या चमकी दिखते ही आशा को सूचित कर तुरंत निःशुल्क 102 एंबुलेंस या उपलब्ध वाहन से नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र जायें।
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