वैशाली में 'बाल हृदय योजना' के तहत निशुल्क जाँच शिविर का आयोजन, 47 बच्चों की हुई स्क्रीनिंग
-जिला पदाधिकारी वर्षा सिंह के निर्देश पर सदर अस्पताल में मेदांता पटना के सहयोग से लगा विशेष कैंप
वैशाली। वैशाली जिले में 'बाल हृदय योजना' के तहत हृदय रोगों से ग्रसित बच्चों को नई जिंदगी देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य जाँच शिविर का सफल आयोजन किया गया। जिला पदाधिकारी वर्षा सिंह के विशेष अनुमोदन और मार्गदर्शन के उपरांत सोमवार को हाजीपुर स्थित सदर अस्पताल में आयोजित इस निशुल्क बाल हृदय रोग जाँच शिविर में जय प्रभा मेदांता सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल पटना और जिला स्वास्थ्य समिति वैशाली ने अपनी सक्रिय सहभागिता निभाई। इस विशेष कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी डीपीएम डॉ. कुमार मनोज, आरबीएसके नोडल अधिकारी शाइस्ता और एनसीडी अधिकारी डॉ. एसके साहू भी मुख्य रूप से उपस्थित रहे, जिनकी देखरेख में पूरे शिविर का संचालन सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।
आधुनिक ईको मशीन से हुई बच्चों के हृदय की सूक्ष्म जाँच:
शिविर के मुख्य आकर्षण के रूप में मेदांता पटना की विख्यात पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. कुमारी सोनी ने अपनी विशेषज्ञ टीम के साथ बच्चों के स्वास्थ्य की गहन जाँच की। इस दौरान अत्याधुनिक ईको मशीन के माध्यम से बच्चों के हृदय की सूक्ष्म जांच की गई ताकि जन्मजात हृदय रोगों, जैसे दिल में छेद या अन्य गंभीर विकारों का सटीक पता लगाया जा सके। विशेषज्ञों की इस टीम ने ईको मशीन की सहायता से कुल 47 बच्चों की विस्तृत स्क्रीनिंग की और उनके अभिभावकों को उचित चिकित्सकीय परामर्श प्रदान किया। जाँच की इस प्रक्रिया में जिन बच्चों में हृदय संबंधी जटिलताएं पाई गईं, उन्हें सरकारी योजना के अंतर्गत चिन्हित किया गया है ताकि भविष्य में उनका निशुल्क उपचार और आवश्यक सर्जरी सुनिश्चित की जा सके।
जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की पहल से अभिभावकों में जगी उम्मीद:
जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के इस सामूहिक प्रयास की स्थानीय नागरिकों ने काफी सराहना की है। जिला पदाधिकारी वर्षा सिंह के नेतृत्व में आयोजित इस शिविर का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को उच्च स्तरीय हृदय रोग विशेषज्ञ की सेवाएं उनके अपने जिले में ही उपलब्ध कराना था। डीपीएम डॉ. कुमार मनोज और उनकी टीम ने बताया कि ईको मशीन से की गई इस त्वरित जाँच से गंभीर रूप से बीमार बच्चों की पहचान में बड़ी सफलता मिली है, जिससे अब इन बच्चों के सफल इलाज का मार्ग प्रशस्त हो गया है। सदर अस्पताल में उमड़ी भीड़ और विशेषज्ञों के परामर्श से दर्जनों परिवारों के बीच अपने बच्चों के स्वस्थ भविष्य को लेकर एक नई उम्मीद जगी है।
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