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    पोखरैरा में फाइलेरिया मरीजों ने सीखे सेहतमंद जिंदगी के मंत्र

    - नियमित सफाई और सही प्रबंधन से ही संभव है 'अक्यूट अटैक' पर प्रभावी नियंत्रण

    ​-  व्यायाम और आत्म-देखभाल के जरिए फाइलेरिया प्रभावित अंगों की सूजन को दी जा सकती है मात

    ​वैशाली। बुधवार को वैशाली जिले के पोखरैरा स्थित आयुष्मान आरोग्य केंद्र की फिजा बदली हुई थी। यहाँ फाइलेरिया की मार झेल रहे मरीजों के चेहरों पर एक नई उम्मीद दिखी, जब उन्हें बीमारी के सही प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया। सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) पूजा रानी के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मरीजों को यह समझाना था कि हाथीपांव भले लाइलाज हो, लेकिन सही देखभाल से इसकी पीड़ा और बढ़ते प्रभाव को रोका जा सकता है।

    ​प्रशिक्षक अमन कुमार ने मरीजों को रूबरू होकर सिखाया कि प्रभावित अंगों की नियमित सफाई और सही देखभाल ही इस बीमारी का सबसे बड़ा उपचार है। उन्होंने बताया कि अक्सर मरीजों को अचानक होने वाले 'अक्यूट अटैक' (तेज बुखार और दर्द) का सामना करना पड़ता है, जिससे अंगों की हालत बिगड़ जाती है। यदि सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए, तो न केवल इन हमलों को रोका जा सकता है, बल्कि अंगों की सूजन में भी धीरे-धीरे सुधार आता है। प्रशिक्षण के दौरान बिरजू पासवान ने एक फाइलेरिया मरीज के तौर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जो इस बीमारी के प्रति लड़ाई में एक जीवंत उदाहरण पेश कर रहे थे।

    ​कार्यक्रम में विशेष व्यायाम (एक्सरसाइज) के महत्व पर भी चर्चा हुई, जो रक्त संचार को बेहतर बनाने में सहायक होते हैं। सीएचओ पूजा रानी ने कहा कि जागरूकता ही बचाव है और सही तकनीक अपनाकर मरीज एक बेहतर जीवन जी सकते हैं। इस प्रशिक्षण सत्र में क्षेत्र के कई प्रभावितों ने सक्रियता से भाग लिया। मौके पर मुख्य रूप से बिरजू पासवान, अभिलाषा कुमारी, प्रतिमा चौधरी, गीता देवी, शोभा देवी, बसंती देवी, मुन्नी देवी और कपिल ठाकुर शामिल रहे। इन सभी मरीजों ने रुग्णता प्रबंधन के गुर सीखे और स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने का संकल्प लिया।

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