मुजफ्फरपुर में सुरक्षित मातृत्व की नई पहल: हर ब्लॉक में खुलेंगे तीन नए एल वन प्रसव केंद्र
-महीने में कम से कम 15 प्रसव का दिया गया एल वन सेंटर को टारगेट
-बड़े अस्पतालों पर भार होगा कम
मुजफ्फरपुर। जिले के स्वास्थ्य महकमे ने ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और संस्थागत प्रसव की दर में क्रांतिकारी सुधार लाने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। मंगलवार को हुई उच्च स्तरीय समीक्षा के अनुसार, जिले के सभी ब्लॉकों में इस माह के अंत तक कम से कम तीन नए एल वन (लेवल-1) प्रसव केंद्र अनिवार्य रूप से शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य प्रसव की सुविधाओं को विकेंद्रीकृत करना है ताकि गर्भवती महिलाओं को आपातकालीन स्थिति में लंबी दूरी तय न करनी पड़े और उनके घर के समीप ही सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित हो सके। विभाग ने इस विस्तार के साथ गुणवत्ता पर भी विशेष जोर दिया है, जिसके तहत हर क्रियाशील एल वन केंद्र के लिए प्रति माह न्यूनतम 15 प्रसव कराने का मानक तय किया गया है।
आंकड़ों में दिखता सकारात्मक बदलाव:
वित्तीय वर्ष 2025-26 के प्रदर्शन आंकड़े जिले में बढ़ रहे जन-विश्वास की तस्दीक करते हैं। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि अप्रैल 2025 में जिले के चिन्हित एल वन केंद्रों पर कुल प्रसव की संख्या मात्र 83 थी, जो दिसंबर 2025 तक बढ़कर 193 के सम्मानजनक आंकड़े तक पहुंच गई है। विशेष रूप से कुढ़नी प्रखंड के मनियारी एपीएचसी ने अपनी सेवाओं के माध्यम से एक मिसाल पेश की है, जहाँ दिसंबर माह में सर्वाधिक 67 प्रसव दर्ज किए गए। इसी प्रकार, बंदरा के रामपुर दयाल केंद्र ने भी निरंतर सुधार दिखाते हुए दिसंबर में 29 प्रसव कराकर अपनी उपयोगिता सिद्ध की है। कटरा के पहशौल और हथौरी जैसे केंद्रों में भी प्रसव की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो यह दर्शाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य ढांचे की स्वीकार्यता बढ़ रही है।
भविष्य की रणनीति और केंद्रों का विस्तार:
जिले में सेवाओं के दायरे को बढ़ाने के लिए विभाग ने एक विस्तृत माइक्रो-प्लानिंग के तहत नए केंद्रों को चिन्हित किया है। औराई प्रखंड में सहजीवर, रामपुर संभूता और सहिलाबल्ली जैसे हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों को नए प्रसव केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है। कांटी ब्लॉक में बीरपुर, मधुबन और लसगरीपुर सहित पांच अलग-अलग स्थानों पर प्रसव सुविधाएं शुरू करने की योजना है। सकरा प्रखंड में चंदनपट्टी और रतनपुर जैसे अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को भी इस सूची में शामिल किया गया है। बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान देते हुए विभाग ने स्पष्ट किया है कि पारू के देवरिया और मुरौल के महम्मदपुर जैसे केंद्रों पर वर्तमान में चल रहे मरम्मत और निर्माण कार्य पूरे होते ही वहां भी प्रसव सेवाएं सुचारू कर दी जाएंगी।
इस रणनीतिक विस्तार और निरंतर मॉनिटरिंग से न केवल सदर अस्पताल और एसकेएमसीएच जैसे बड़े अस्पतालों पर बोझ कम होगा, बल्कि मुजफ्फरपुर के सुदूर इलाकों में मातृ मृत्यु दर को कम करने के मिशन को भी नई गति मिलेगी।
No comments