कुपोषण के विरुद्ध हथौड़ी पंचायत की बड़ी घेराबंदी: मुखिया ने आंगनवाड़ी केंद्रों को आधुनिक मशीनों से किया लैस
-मुखियागण ने कुपोषण मुक्त पंचायत बनाने का उठाया बीड़ा
मुजफ्फरपुर। कटरा प्रखंड की हथौड़ी पंचायत को कुपोषण मुक्त बनाने की दिशा में शनिवार को एक निर्णायक कदम उठाया गया। पंचायत भवन में आयोजित विशेष बैठक में मुखिया श्री इश्तेयाक़ अहमद ने बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और विकास की निगरानी के लिए पंचायत की सभी 16 आंगनवाड़ी सेविकाओं को वजन मापने की मशीनें वितरित कीं। समन्वय आधारित इस पहल में स्वास्थ्य विभाग और पिरामल फाउंडेशन ने भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित की।
वजन मशीनों से होगी कुपोषण की सटीक पहचान:
पंचायत की 16 आंगनवाड़ी सेविकाओं के बीच वजन मशीनों का वितरण इस अभियान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। अब तक संसाधनों के अभाव में बच्चों के शारीरिक विकास की सही मैपिंग में जो बाधाएँ आ रही थीं, वे दूर हो जाएंगी। इन उपकरणों के माध्यम से अब प्रत्येक बच्चे के वजन की नियमित रिकॉर्डिंग होगी, जिससे कुपोषण के शिकार बच्चों की समय रहते पहचान कर उन्हें आवश्यक उपचार और आहार उपलब्ध कराया जा सकेगा।
संस्थागत प्रसव के लिए 'होम डिलीवरी मुक्त' पंचायत का लक्ष्य:
स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से हथौड़ी पंचायत को 'होम डिलीवरी मुक्त' (घर पर प्रसव मुक्त) बनाने की रणनीति पर मुहर लगाई गई। मुखिया ने स्पष्ट किया कि सुरक्षित मातृत्व और शिशु के उज्ज्वल भविष्य के लिए अस्पतालों में प्रसव कराना अनिवार्य है। इस हस्तक्षेप के माध्यम से पंचायत स्तर पर मातृ-शिशु मृत्यु दर को न्यूनतम करने का लक्ष्य रखा गया है।
विशेष प्रपत्र से होगी कुपोषित बच्चों की निगरानी:
बच्चों के स्वास्थ्य की निरंतर जांच के लिए मुखिया द्वारा एक विशेष 'ट्रैकिंग फॉर्मेट' (निगरानी प्रपत्र) तैयार किया गया है। इसके जरिए अति गंभीर और मध्यम कुपोषित बच्चों की सूची बनाकर उनकी साप्ताहिक समीक्षा की जाएगी। यह प्रपत्र जमीनी स्तर पर जवाबदेही तय करने और बच्चों की सेहत में होने वाले सुधार को मापने का मुख्य आधार बनेगा।
विभागों के समन्वय से जमीनी बदलाव की तैयारी:
इस ऐतिहासिक पहल के दौरान पिरामल फाउंडेशन के जिला प्रतिनिधि सैयद नसीरुल होदा और महिला पर्यवेक्षिका रंभा कुमारी ने ग्राम सभा को संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि जब पंचायती राज संस्थान, स्वास्थ्य विभाग और आईसीडीएस एक साथ मिलकर कार्य करते हैं, तो कुपोषण जैसी चुनौतियों को आसानी से हराया जा सकता है। सामूहिक प्रयास और बेहतर तालमेल से अब हथौड़ी पंचायत पूरे जिले के लिए एक मॉडल के रूप में उभर रही है।
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