मुजफ्फरपुर को फाइलेरिया मुक्त बनाने का संकल्प: 10 फरवरी से शुरू होगा महाअभियान, तीन नए केंद्रों को मिला एनक्यूएएस प्रमाणन
- 63.16 लाख से अधिक की आबादी होगी लाभान्वित
- 2025 में माइक्रोफाइलेरिया संक्रमण की औसत दर 2.50 प्रतिशत
मुजफ्फरपुर। जिले को हाथीपांव (फाइलेरिया) जैसी गंभीर बीमारी से मुक्त करने और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय मानकों तक ले जाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन की अध्यक्षता में सोमवार जिला समन्वय समिति की बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में जहां एक ओर आगामी 10 फरवरी 2026 से सर्वजन दवा सेवन अभियान की शुरुआत की घोषणा की गई, वहीं जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गौरव की बात रही कि तीन नए स्वास्थ्य केंद्रों को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक का प्रमाणन प्राप्त हुआ है।
स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता का विस्तार:
डीपीएम रेहान अशरफ ने बताया कि तीन नए एनक्वास केंद्र जिले में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करने की दिशा में रेपुरा (मीनापुर), नरौलीडीह (मुशहरी) और विशुनपुर (बांद्रा) के स्वास्थ्य केंद्रों को एनक्वास प्रमाणन से जोड़ा गया है। इन केंद्रों के जुड़ने से अब स्थानीय आबादी को मानक के अनुरूप बेहतर चिकित्सीय सुविधाएं प्राप्त हो सकेंगी। जिलाधिकारी ने इन क्षेत्रों के प्रभारियों को निर्देश दिया कि गुणवत्ता के इस मानक को बनाए रखते हुए आगामी फाइलेरिया उन्मूलन अभियान में भी इन केंद्रों की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित की जाए।
आंकड़ों की आईना: संक्रमण की वर्तमान स्थिति
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, मुजफ्फरपुर की 63.16 लाख से अधिक की आबादी को इस अभियान के तहत सुरक्षित करना अनिवार्य है। वर्ष 2025 की नाइट ब्लड सर्वे रिपोर्ट के अनुसार जिले में माइक्रोफाइलेरिया संक्रमण की औसत दर 2.50 प्रतिशत दर्ज की गई है। प्रखंड वार आंकड़ों को देखें तो बांद्रा में 6.63 प्रतिशत, मुशहरी में 3.17 प्रतिशत और मीनापुर में 1.17 प्रतिशत की संक्रमण दर पाई गई है, जो इस अभियान की गंभीरता को दर्शाती है।
रणनीतिक तैयारी: 17 दिनों का सघन एक्शन प्लान
फाइलेरिया के खात्मे के लिए प्रशासन ने 17 दिनों का विशेष प्लान तैयार किया है। अभियान के पहले 14 दिनों तक आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर अपनी प्रत्यक्ष निगरानी में लोगों को दवा खिलाएंगी, जिसके बाद अंतिम 3 दिनों में छूटे हुए लोगों के लिए बूथ कैंप लगाए जाएंगे। इस कार्य के लिए जिले में कुल 2,537 टीमों का गठन किया गया है, जिसमें 4,073 आशा कार्यकर्ताओं के साथ-साथ आंगनबाड़ी सेविकाओं और स्वयंसेवकों को दवा वितरक के रूप में तैनात किया गया है।
विभागीय समन्वय और सुरक्षा मानक:
जिलाधिकारी ने शिक्षा, जीविका, नगर निगम और पंचायती राज जैसे विभागों को आपसी समन्वय से इस अभियान को जन-आंदोलन बनाने का निर्देश दिया है। अभियान के दौरान ऊंचाई और उम्र के आधार पर आइवरमेक्टिन, डीईसी और एल्बेंडाजोल की गोलियां दी जाएंगी। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह दवाएं कभी भी खाली पेट नहीं लेनी चाहिए। दवा सेवन के बाद मामूली बुखार या सिरदर्द जैसे लक्षण संक्रमण के कीटाणुओं के मरने का संकेत हैं, जिसके प्रबंधन के लिए रैपिड रिस्पांस टीम को तैनात किया गया है। मौके पर सिविल सर्जन डॉ अजय कुमार, डीपीएम रेहान अशरफ, जिला वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ सुधीर कुमार, डब्लू एच ओ रीजनल कोऑर्डिनेटर डॉ माधुरी देवराजू, सीएफआर और पिरामल के जिला प्रतिनिधि समेत अन्य स्वास्थ्य पदाधिकारी मौजूद थे।
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