सीतामढ़ी में स्वास्थ्य का विकास छू रहा नित नए आकाश
सीतामढ़ी में स्वास्थ्य का विकास छू रहा नित नए आकाश
- पिछले पांच वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र में पाई हैं कई उपलब्धियां
- मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में भी विकास की राहों पर अग्रसर
सीतामढ़ी, 11 अक्टूबर ।
लोकतंत्र में यह अपेक्षा रहती है कि सरकार उनके कल्याण के लिए कार्य करे। इस कोविड काल में स्वास्थ्य के प्रति सरकार और नागरिकों की सोच में भी बदलाव हुआ है। यह बदलाव निश्चित रूप से सकारात्मक है। जिसका असर हालिया कुछ वर्षों में सीतामढ़ी में भी देखने को मिला है, चाहे वह मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की बात हो या संचारी और गैर संचारी रोग की बात हो। इसके साथ ही एईएस में भी सीतामढ़ी ने जागरूकता की बदौलत जो बदलाव लाए हैं वह बच्चों के चेहरे पर मुस्कुराहट लाने में सराहनीय कदम हैं। आइए एकबारगी ही सही नजर डालते हैं सीतामढ़ी के स्वास्थ्य में हुए सुधार पर......
पिछले कुछ वर्षों में सीतामढ़ी जिले ने विकास का एक नया लंबा सफर तय किया है। जिसका असर स्वास्थ्य सेवाओं तथा इसके इंफ्रास्ट्रक्चर पर साफ दिखता है। अब विभिन्न तरह की स्वास्थ्य सेवाएं जिले में ही मौजूद हैं। यह सेवाएं जिले में अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से ही शुरू हो जाती हैं जो बेहतर होती हुई जिला सदर अस्पताल तक भी जाती हैं। आरोग्य दिवस सत्रों पर लाइन में टीकाकृत होते बच्चे तथा प्रसव पूर्व जांच कराती गर्भवतियों को देख एक नयी बयार का पता चलता है। सीतामढ़ी जिले में कुल 16 प्रखंड हैं। इसमें से 11 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तथा 5 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 40 एपीएचसी और 208 हेल्थ सब सेंटर हैं। इसमें से बेलसंड के फर्स्ट रेफरल यूनिट बनाने की भी योजना के साथ 5 में से 2 को सीएचसी में भी बदलने की योजना है। अगर नई नियुक्ति की बात करें तो लगगभ 115 जीएनएम सदर में , 25 पुपरी, 25 बेलसंड तथा पांच -पांच अन्य स्वास्थ्य केंद्रों को मिला है। अभी भी रिक्त स्वास्थ्यकर्मियों को भरने की प्रक्रिया राज्य सरकार द्वारा जारी है। इसके अलावा डुमरा स्थित एएनएम स्कूल पारामेडिकल के क्षेत्र में भविष्य बनाने वाले छात्रों का उत्साह दोगुना कर रहा है।
सदर अस्पताल में सुविधाएं भरपूर
जिले का सदर अस्पताल में मिलनी वाली सुविधाएं किसी आयाम से निजी अस्पतालों से मिलने वाली सुविधाओं से कम नहीं हैं। 1000 लीटर प्रति मिनट के ऑक्सीजन प्लांट के साथ आरटी पीसीआर लैब जिसमें रोजाना 800 कोविड जांचे हो सकती हैं। 6 वेंटिलेटर सुविधा वाले आईसीयू , डीसीएससी की सुविधा के साथ 5 बेड वाले डाइलसिस वार्ड की भी सुविधा उपलब्ध हैं। इसके अलावा डिजिटल एक्सरे, अल्ट्रासाउंड की नई व्यवस्था चालू हुई है। सदर अस्पताल में बना इसी वर्ष 100 बेड का बने मातृ एवं शिशु अस्पताल ने सुरक्षित संस्थागत प्रसव में अपना रूतबा कायम किया है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 4 के अनुसार यहां संस्थागत प्रसव मात्र32.7 प्रतिशत था जो राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 5 के अनुसार 64.4 है। एपीएचसी स्तर मिलने वाली टेलीमेडिसीन की सुविधाओं ने गर्भवतियों को जटिल गर्भधारण भी सुरक्षा का कवच दिया है। प्रथम तिमाही में एएनसी कराने वाली महिलाओं में 25.3 प्रतिशत की वृदि्ध दर्ज की गयी है। सदर अस्पताल में स्थित सी सेक्शन जटिल प्रसव को भी आसान और सुरक्षित बना रहा है। एनएफएचएस 4 में यह डेटा इसका प्रतिशत जहां 3.6 था यह एनएफएचएस 5 में 8.5 हो गया है। नवजात के लिए बना एसएनसीयू अत्याधुनिक उपकरणों से लैस है जिसमें वार्मर, सक्शन मशीन, पारामेडिकल स्टॉफ और शिशु रोग विशेषज्ञ की 24 घंटे उपलब्धता इसे खास बनाता है।
एईएस पर लगा लगाम
सीतामढ़ी के चार जिले एईएस से सबसे ज्यादा अक्रांत थे। एक समय था जब जिले में एक अनसुलझी पहेली थी। विगत कुछ वर्षो का परिणाम है कि प्रत्येक पीएचसी/सीएचसी पर दो बेड का एक वार्ड एईएस के लिए बनाया गया। जहां उचित मेडिकल उपकरण और दवाइयों के साथ चौबीसों घंटे डॉक्टर और पारामेडिकल की टीम मौजूद रहती है। चमकी के लिए अनेक विधियों से जागरूकता अभियान चलाए गए। चार विशेष एम्बुलेंस तथ 1000 ये अधिक प्राईवेट टैग वाहन रखे गए जिसकी बदौलत एईएस से प्रभावितों की संख्या में कमी आयी। इस वर्ष एईएस के जिले में मात्र 9 केस आए जिनमें से अधिकतर बच्चों को बचा लिया गया।
कालाजार फाइलेरिया पर बनायी पहचान
जिले में कालाजार का उन्मूलन 2018 में ही हो गया। इसके लिए सिंथेटिक पाइराथाइरॉइड का छिड़काव और जागरूकता अभियान ने काफी प्रभाव डाला। जिला वेक्टर जनित रोग पदाधिकारी डॉ रविन्द्र कुमार यादव ने 2018 में दिल्ली में फाइलेरिया पर 73 देशों के सामने पहली बार फाइलेरिया पर माइक्रोप्लान सामने रखा जिसका अनुसरण आज पूरा देश कर रहा है। वहीं इनके लिखे कालाजार पर शोध को विदेशी जर्नलों ने भी स्थान दिया है।
13 लाख से अधिक का किया टीकाकरण
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ एके झा कहते हैं कि कोविड टीकाकरण के शुभारंभ से अभी तक हमलोग 1327054 लोगों को टीकाकृत कर चुके हैं। इसमें 1141731 लोगों को प्रथम डोज का टीका तथा 185323 लोगों को दूसरे डोज का टीका लगा चुके हैं। वहीं कोविड के दौरान डेडिकेटेड कोविड सेंटर, बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों की कोविड जांच सहित अन्य कार्य भी किए। जिसके अच्छे परिणाम रहे।
टीबी रोगियों को मिली दिशा
पिछले कुछ वर्षों में टीबी रोगियों के लिए निक्षण पोषण योजना के तहत 500 रूपये दिए जा रहे हैं। टीबी रोगियों के इलाज के लिए डीआर टीबी सेंटर की स्थापना हुई। जांच के लिए सीबी नेट, ट्रू नेट मशीन का उपयोग होने लगा। एमडीए मरीजों के लिए बेडाक्वीलीन दवा जो पहले सिर्फ आईजीआईएमएस पटना और अगमकुआ टीबी सेंटर में ही उपलब्ध थी अब जिले में भी मौजूद है। बच्चों के टीबी के लिए डिलामिनेट दवा भी अब जिले में ही मौजूद है। प्राइवेट प्रैक्टिशनरों से भी टीबी मरीजों की जानकारी ली जा रही है ताकि उन्हें भी समुचित और सही इलाज मिल पाए।
500 बेड के मेडिकल कॉलेज व अस्पताल का हो रहा है निर्माण
सीतामढ़ी के स्वास्थ्य को नई दिशा और दशा देने के उद्येश्य से जिले के मुरादपुर में 500 बेडेड मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का निर्माण हो रहा है। यहां करीब 100 छात्र- छात्राएं मेडिकल की पढ़ाई करेगे।
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