डीईसी, अल्बेंडाजोल का कोई दुष्प्रभाव नहीं होता: डॉ शरद चंद्र शर्मा
डीईसी, अल्बेंडाजोल का कोई दुष्प्रभाव नहीं होता: डॉ शरद चंद्र शर्मा
- खाना खाकर लेनी होती है दवा
- किसी तरह की अफवाहों पर न दें ध्यान
मोतिहारी, 08 अक्टूबर। एमडीए राउंड के दौरान दी जाने वाली दवा बिल्कुल ही सुरक्षित है। इसका आपके शरीर पर किसी तरह का कोई खराब प्रभाव या हानि नहीं होती। इस दवा को लेने के कुछ नियम हैं, जैसे खाली पेट में इस दवा को नहीं लेना है। गंभीर रोगियों, गर्भवती महिलाओं, 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को भी यह दवा नहीं खानी है। ये बातें केसरिया में एमडीए राउंड की गोली खाने के बाद कुछ मामलों में हुई मामूली समस्या (एडवर्स रिएक्शन) पर जिला भिबीडी नियंत्रण पदाधिकारी डॉ शरत चंद्र शर्मा ने कही है। उन्होंने कहा कि अभी तक इस गोली का कोई दुष्प्रभाव नहीं देखा गया है।
आशा कार्यकर्ता द्वारा अपने सामने दवा खिलाई जा रही है
डॉ शरद चन्द्र शर्मा ने बताया कि जिले को फाइलेरिया ( हाथी पाँव) से मुक्त बनाने के लिए दूसरे चरण का सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम शुरू किया गया है। अभियान के दौरान बच्चों व अन्य लाभार्थियों को फाइलेरिया से बचाव को लेकर स्वास्थ्य कर्मियों के सहयोग से आशा कार्यकर्ता द्वारा अपने सामने दवा खिलाई जा रही है। उन्होंने बताया कि जिले को 1 करोड़ 48 लाख 54 हजार 800 फाइलेरिया रोधी दवाएं प्राप्त हुई हैं । जिसे सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को उपलब्ध कराया गया है।
दवा खाने के नहीं हैं कोई खास साइड इफेक्ट:
डॉ शरद चन्द्र शर्मा ने कहा कि फाइलेरिया की दवा के प्रयोग से किसी को भी खास साइड इफेक्ट नहीं हो रहा है। उन्होंने बताया कि इस दवा के सेवन से कुछ ही लोगों में गैस, उल्टी, चक्कर, इत्यादि होने की संभावना होती है परंतु इससे घबराने की आवश्यकता नहीं है। यह सामान्य लक्षण है। उन्होंने बताया कि दवा सेवन से केसरिया प्रखंड के बथना में लगभग 2 दर्जन लोगों को कुछ समस्याएं हुई, जिसके उपरांत तुरंत मेडिकल टीम को स्थल पर भेज कर डॉ मोगीश द्वारा लोगों की चिकित्सा की गई। वहीं स्वास्थ्य विभाग की टीम को भेजकर लोगों के स्वास्थ्य के बारे में पता लगाया गया।
इलाज के बाद मरीज ठीक होकर घर चले गए
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अर्चना कुमारी ने बताया कि दवा का हल्का साइड इफेक्ट था, जिसके कारण लोगों को पेट दर्द ,उल्टी, चक्कर, जैसे लक्षण मिले, इलाज के बाद मरीज ठीक होकर घर चले गए। क्षेत्र में एकाएक लोगों की तबीयत खराब होने की खबर फैल जाने से लोग दवा खाने से डर गए थे, परन्तु बाद में सबकी सामान्य स्थिति होने के बाद अब आज से पुनः क्षेत्र में दवा सेवन कार्यक्रम शुरू किया गया है। वहीं केसरिया के केयर इंडिया के ब्लॉक मैनेजर राजकुमार ने बताया कि अब वहां किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं है।
किसी तरह की अफवाहों पर न दें ध्यान :
भीबीडी कंसल्टेंट अभिषेक कुमार व पीसीआई के एसएमसी मनोज कुमार ने बताया कि क्षेत्र में जाकर लोगों को फाइलेरिया के बारे में जागरूक किया गया। जिसमें प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी, ब्लॉक मैनेजर व अन्य स्वास्थ्य कर्मी ने भी सहयोग किया। उन्होंने कहा कि लोगों को -किसी भी प्रकार के अफवाहों से बचना चाहिए। दवा खाने से किसी को किसी प्रकार की विशेष तकलीफ या दिक्कत होती है तो वैसे लोग जाकर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सक की सलाह से अपनी स्वास्थ्य जांच करा सकते हैं।
फाइलेरिया की दवा का सेवन सभी लोगों के लिए लाभप्रद
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी ने बताया कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए आशा घर-घर जाकर 2 साल से अधिक उम्र के लोगों को अपने सामने फाइलेरिया की दवा खिला रही हैं। उन्होंने बताया कि फाइलेरिया एक गंभीर रोग है जिसे फाइलेरिया की दवा के सेवन से ही बचा जा सकता है। कभी-कभी फाइलेरिया के परजीवी शरीर में होने के बाद भी इसके लक्षण सामने आने में वर्षों लग जाते हैं । इसलिए फाइलेरिया की दवा का सेवन सभी लोगों के लिए लाभप्रद है। उन्होंने बताया लोग खाली पेट दवा का सेवन नहीं करें। 2 साल से कम उम्र के बच्चे, गंभीर रोग से ग्रसित एवं गर्भवती महिला को फाइलेरिया की दवा नहीं खिलानी है ।
ऐसे करें फाइलेरिया की दवा का सेवन :
फाइलेरिया मुक्त अभियान में डीईसी एवं अल्बेंडाजोल की गोलियाँ लोगों की दी जा रही हैं। 2 से 5 वर्ष तक के बच्चों को डीईसी की एक गोली एवं अल्बेंडाजोल की एक गोली, 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को डीईसी की दो गोली एवं अल्बेंडाजोल की एक गोली एवं 15 वर्ष से अधिक के लोगों को डीईसी की तीन गोली एवं अल्बेंडाजोल की एक गोली दी जाएगी। अल्बेंडाजोल का सेवन चबाकर किया जाना है।
फाइलेरिया बीमारी के लक्षण :
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी ने बताया कि इसमें बुखार का आना, शरीर पर लाल धब्बे या दाग का होना एवं शरीर के अंगों में सूजन का आना फाइलेरिया की शुरुआती लक्ष्ण होते हैं। यह क्यूलेक्स नामक मच्छर के काटने से फैलता है। आमतौर पर बचपन में होने वाला यह संक्रमण लसिका (लिम्फैटिक) प्रणाली को नुकसान पहुँचाता है। फाइलेरिया से जुडी विकलांगता जैसे लिंफोइडिमा ( पैरों में सूजन) एवं हाइड्रोसिल(अंडकोश की थैली में सूजन) के कारण पीड़ित लोगों को इसके कारण आजीविका एवं काम करने की क्षमता प्रभावित होती है ।
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